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मधुमक्खी पालकों ने सरसों फसल के किनारे जमाए डेरे

7 वर्ष पहले
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सरसोंकीफसल के अभी फूल आने भी शुरू नहीं हुए हैं, लेकिन मधुमक्खी पालकों ने अस्थायी तौर पर अपने डेरे जमाना शुरू कर दिया है। करीब बीस फीसदी स्थानों पर मधुमक्खियों के डिब्बे रखे जा चुके हैं।

कृषि अधिकारियों के अनुसार मधुमक्खी पालन से जहां मधुमक्खी पालकों को शहद मिलता है, वहीं किसानों को सरसों की फसल में भी फायदा मिलता है।

गांव दो जीबी, पांच जीबी, सात जीबी, मघेवाली ढाणी सात एलसी गांवों में डेरा जमाए भूरसिंह, सौदागरसिंह नटूसिंह ने बताया कि पंजाब में सरसों की खेती कम गेहूं की खेती अधिक होती है। इसके चलते उन्हें राजस्थान आना पड़ता है। सरसों के खेतों के समीप इन डिब्बों को रखा जाता है। सरसों के फूलों से मधुमक्खियां उनकी ओर से लगाए गए डिब्बों के छतों में मधु एकत्रित करती रहती हैं। पन्द्रह से बीस दिन के बीच मशीन से शहद निकालकर बीस-बीस किलोग्राम के डिब्बों में शहद पैक किया जाता है। इस व्यवसाय से जुडे लोगों ने बताया कि पहले इस व्यवसाय से कम लोग जुड़े हुए थे। इससे उन्हे मुफ्त में जमीन मिल जाती थी। अब इसके व्यापारी बढ़ने से किसान उनसे जमीन का किराया भी लेने लगे हैं। उन्होंने बताया कि एक प्लांट से 20 से 30 क्विंटल शहद मिल जाता है।