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नगरपरिषद के बाद अब यूआईटी का खजाना भी हो रहा है खाली
नगरपरिषद के खाते में मात्र 30 लाख, नजर 28 करोड़ 70 लाख पर
नगर संवाददाता|श्रीगंगानगर.
नगरपरिषदकी माली हालत काफी समय से खराब चल रही थी। अब यूआईटी की स्थिति भी वैसी हो गई है। शहर के इन दोनों निकायों का खजाना खाली होने वाला है। इससे अब शहर में धीमी गति से विकास होगा। दोनों विभागों की नजर आगामी दिनों में होने वाली आमदनी पर टिकी है। खजाने को कैसे भरा जाए, इसकी योजना तैयार की जा रही है।
यूआईटीके खाते में 2 करोड़, नजर 12 करोड़ पर
यूआईटीकी माली हालत पहले कभी खराब नहीं हुई। विभाग के खाते में अकसर करोड़ों रुपए रहते हैं। लेकिन इस बार यूआईटी के खाते में केवल 2 करोड़ रुपए ही रह गए हैं। यूआईटी अपने कर्मचारियों को होने वाली आमदनी से प्रति माह 18 लाख का भुगतान करता है। विभाग की नजर अब आने वाली 13 करोड़ की आमदनी पर टिकी है। इसके बाद ही 14-15 के बजट के अनुसार विकास कार्य हो पाएंगे।
31भूखंडों की नीलामी से आएंगे 5 करोड़
यूआईटी15,16 17 दिसंबर को 31 भूखंडों की नीलामी करवाने जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि इन भूखंडों से तकरीबन 5 करोड़ की आमदनी हो सकती है।
नगरपरिषद के खाते में सोमवार को करीब 60 लाख रुपए थे। इसमें से 20 लाख अस्थाई कर्मचारी, कचरा उठाव की रेहड़ियों 10 लाख रुपए स्टोर का भुगतान किया है। गुरुवार शाम को खाते में महज 30 लाख रुपए ही रह गए। सभापति ने भूमि विक्रय शाखा को खजाना भरने के लिए रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। शाखा ने लिखित रूप में बताया कि धानमंडी के पिड़ों के नियमन से कुल दुकानों की राशि में से 31 दुकानों की राशि जमा हो चुकी है। शेष 69 दुकानों की राशि वर्तमान डीएलसी दर अनुसार 28 करोड़ रुपए वसूल करने को कहा है। वहीं हाउस टैक्स की वसूली से 70 लाख रुपए आने वाले हैं। सोमवार को विभाग इसकी सूची बनाकर सभापति के सामने प्रस्तुत करेगा। व्यावाहरिक तौर पर देखें तो इस वसूली में काफी वक्त लग सकता है।