श्रीगंगानगर. जिले भर में यूरिया के लिए मारामारी मची है। एक बैग के लिए किसान को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन कारोबारियों के पास यूरिया की कोई कमी नहीं है।
इसका खुलासा तब हुआ, जब सिविल अस्पताल के मेडिकल स्टोर में गुरुवार रात यूरिया के 100 बैग रखवाए गए। लोगों की आशंका थी कि इस यूरिया की कालाबाजारी की जानी है। भास्कर ने यूरिया की जांच के लिए उक्त सूचना जब कृषि विभाग को दी तो जिम्मेदार अधिकारी बोले, अब रात हा़े गई है। कार्रवाई नहीं हो सकती।
शुक्रवार सुबह कार्रवाई करेंगे। कृषि अधिकारियों की यह बेफ्रिकी तब है, जब बुधवार को ही संभागीय बैठक में अधिकारियों ने यूरिया की कमी को गंभीर मानते हुए जिले की कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा जताया था।
भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि शहर में गुरुवार को यूरिया के 500 से ज्यादा बैग आए थे। सुबह कार्रवाई के डर से इन्हें रात को गोदामों में भेजने का तय किया गया। इनमें 400 से ज्यादा बैग विनोबा बस्ती के एक मकान में रखवाए गए, जबकि 100 बैग सिविल अस्पताल परिसर में बने लक्ष्मी मेडिकोज में रखवाए गए।
कारोबारी ज्ञान अरोड़ा ने भी बताया कि कुल 500 बैग यूरिया आए हैं। विनोबा बस्ती के गोदाम में जगह नहीं होने के कारण 100 बैग अस्पताल परिसर की एक दुकान में रखवाए गए हैं। उसने बिल्टी होने का भी दावा किया।
पहले बताया गलत नाम, बाद में सही
ट्राले के साथ एक व्यक्ति दिखा। भास्कर ने उससे बातचीत की तो उसने अपना नाम रामकिशन बताया। फिर कहा कि उसका असली नाम ज्ञान अरोड़ा है। यूरिया उतरते की फोटो खींचने पर उस व्यक्ति ने खबर छापने का आग्रह किया।
इसके बाद वही व्यक्ति भास्कर कार्यालय पहुंचा। खुद को ज्ञान अरोड़ा बताते हुए उसने कहा कि मैं यूरिया की कालाबाजारी नहीं करता। यह यूरिया किसी और व्यक्ति की है। अरोड़ा से पूछा कि यह यूरिया किसका है और किसके कहने पर यहां उतारा जा रहा है तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।