फ्रैक्चर था ही नहीं पैर में डाल दी रॉड
पैर काटने की सकती है नौबत : विशेषज्ञ
श्रीगंगानगर के एक अस्थि रोग विशेषज्ञ से भास्कर ने इस संबंध में जब बातचीत की तो उन्होंने आरोपी डॉ. प्रदीप सहारण को बैचमेट मित्र बताते हुए नाम छापने की शर्त पर बताया कि बिना जरूरत के रॉड डालने से इन्फेक्शन का खतरा उत्पन्न हो सकता है। हड्डी के अंदर इन्फेक्शन से पैर काटने तक की नौबत सकती है।
सपोर्टिंगहड्डी में डाली गई है पतली रॉड : अस्थिरोग विशेषज्ञ के मुताबिक घुटने से नीचे एड़ी के जोड़ तक दो हड्डियां होती हैं, जिसमें मेन हड्डी टीबिया और सपोर्टिंग हड्डी फिबुला होती है। आरोपी डॉक्टर प्रदीप सहारण ने सपोर्टिंग हड्डी फिबुला में ऑपरेट कर पतली रॉड डाली है।
मुझे फंसाया जा रहा है
^रोगीके पंजे में फ्रैक्चर था, इसलिए ऑपरेशन किया। कुछ लोग मुझे फंसाने की साजिश कर रहे हैं। डॉ.प्रदीपसहारण
मेडिकल रिपोर्ट जिसमें हुआ खुलासा।
यह है पूरा मामला
टाउनपुलिस ने 18 नवंबर को इस संबंध में कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज किया था। जंक्शन की भट्टा बस्ती के जावेद पुत्र शाकिर अली ने बताया कि 24 अक्टूबर को डॉ.प्रदीप सहारण के निजी अस्पताल कान्हाराम सहारण मैमोरियल ट्रोमा एंड मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में चेकअप कराया। इस दौरान डॉ.प्रदीप सहारण ने उसके बाएं पैर में फ्रैक्चर बताते हुए ऑपरेशन कर रॉड डाल दी। इसके बाद परेशानी बढ़ी तो उसने एक्सरे कराकर अन्य कई डॉक्टर्स से परामर्श लिया तो बिना फ्रैक्चर के पैर की फिबुलाबॉन में रॉड डालना बताया गया।
पुलिसने सुनवाई नहीं की तो पहुंचा कोर्ट
अन्यडॉक्टरों से परामर्श के बाद अपने साथ हुई ठगी का पता चलने पर जावेद ने टाउन पुलिस थाने में शिकायत की, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। इस पर उसने कोर्ट में इस्तगासा दायर किया। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसी के तहत पीएमओ ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर जांच के निर्देश दिए थे। चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड में सर्जन डॉ.दीपक सैनी, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.मनोज शर्मा,अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.यूसुफ गौरी फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. शंकरलाल सोनी शामिल थे।
रुपए नहीं मुझे न्याय चाहिए
राजीनामाकरने के लिए कुछ लोग मुझ पर दबाव डाल रहे हैं। डॉक्टर ने चंद रुपयों की खातिर मेरी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है। मुझे रुपए नहीं न्याय चाहिए। ऐसे डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जावेद