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सुविधाएं हैं नहीं, कैसे मिलें पदक

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता| श्रीगंगानगर.

खिलाड़ीचाहे जितनी मेहनत कर लें, लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते वह पदक से चूक जाते हैं। यह कहना है जूडो के नेशनल कोच देशराज का। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर शहर में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो सुविधाओं से वंचित होने की वजह से आगे नहीं बढ़ पाते। अगर उनको थोड़ी सी सुविधाएं मिल जाएं तो वे नेशनल से लेकर इंटरनेशनल तक में अपना परचम लहरा सकते हैं। खिलाड़ियों को जूडो की ट्रेनिंग स्टेडियम में देनी चाहिए, लेकिन यहां पर तो कोच हैं ही कोई अन्य सुविधा, जिसका खमियाजा राज्य स्तरीय खिलाड़ियों को भुगतना पड़ता है। अंधविद्यालय में जारी राज्य स्तरीय 59वीं जूडो प्रतियोगिता के दौरान भास्कर संवाददाता से बातचीत में देशराज ने बताया कि श्रीकरणपुर में कई कोच हैं, लेकिन वहां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इसके बावजूद इंटरनेशनल खिलाड़ी वहां से निकल चुके हैं।

श्रीकरणपुरसे निकले हैं तीन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

वर्तमानमें श्रीकरणपुर में 9 कोच हैं और ये कोच हर खिलाड़ी पर विशेष ध्यान देते हैं। इसकी वजह से यहां से अब तक सिर्फ तीन ही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए निकले हैं। कोच देशराज ने बताया कि 4 वी गांव निवासी देवेंद्र सिंह अपनी कड़ी मेहनत से आगे निकला और फिर उसे आगे के अभ्यास के लिए पंजाब भेजा गया, जिसकी वजह से वह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर लाया था। 32 एच गांव निवासी बलविंदर सिंह 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में खेला तो लेकिन पदक हासिल करने में चूक गया, लेकिन इस समय वह विश्वकप के कैंप में अपना हुनर दिखा रहा है। तीसरी खिलाड़ी गगनदीप कौर पहले करणपुर में अपना प्रशिक्षण किया फिर उन्हें भी पंजाब प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था, तब उन्होंने 2012 में दक्षिण कोरिया में हो रही अंतरराष्ट्रीय सकेसीकप में हिस्सा लिया था।

अबतक श्रीकरणपुर के नेशनल खिलाड़ी

गोल्ड : बलविंदरसिंह, देवेंद्र सिंह, गगनदीप कौर, दीपक

सिल्वर:अजयकुमार, रमनदीप

ब्रांज: गगनदीपसिंह, लक्ष्मी नारायण, राजकुमार, दीपक, हरजीत सिंह, संदीप, सुखविंदर कौर, सुखविंदर सिंह।

येमिलनी चाहिए सुविधाएं

जूडोमेट, रेगुलर दो टाइम प्रैक्टिस, जिम, जूडो गी (ड्रेस), प्रशिक्षण के लिए प्रॉपर हॉल, फंड के लिए रुपए, डाइट में रुपए की वृद्धि, खिलाड़ियों की डाइट - जैसे: दूध, दही, अंडा, सेब, मेवा आदि।