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12 पशु और मरे, महामारी से बचने के लिए मृत पशुओं को गड्‌डे खोदकर दफनाने की हिदायत

5 वर्ष पहले
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भास्करव संवाददाता|श्रीकरणपुर

मोटासरखूनीमें बुधवार रात से गुरुवार शाम तक 8 और पशुओं की मौत हो गई। गांव 2 एफएफए, 3 एफएफए तथा 19 एफएफ में भी चार पशुओं की मौत हो गई। इस तरह मुंहपका खुरपका रोग से मरने वाले पशुओं की संख्या 92 हो गई है। इस बीच कलेक्टर पीसी किशन ने गांव का दौरा किया। पशुपालकों ने उपचार के प्रभावी कदम उठाने की मांग की। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। इस पर कलेक्टर ने पूर्व सरपंच से कहा कि राजनीति की बचाए पशुओं के उपचार में सहयोग करें तो बेहतर होगा। ग्रामीणों से मिले फीडबैक के बाद बीडीओ बीडीओ सुखविंद्रसिंह ने सुझाव दिया कि मृत पशुओं को इधर-उधर फेंकने की बजाय दफनाया जाए। इस पर ग्रामीण नाराज हो गए। इस पर नायब तहसीलदार और कांग्रेसी नेताओं ने बीच-बचाव किया। इससे पहले कलक्टर ने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है। मृत पशुओं के निस्तारण में ग्रामीण सहयोग करें। प्रशासन गड्‌डा खुदवाकर, नमक उपलब्ध करवा सकता है। मृत पशुओं से नुकसान का सर्वे करवाया जा रहा है। कलेक्टर के साथ एसडीएम नेकराम नागर, नायब तहसीलदार मदनलाल लाहोरा, गजसिंहपुर थानाधिकारी श्यामसुंदर वेटनरी डाक्टरों की टीम थी।

श्रीकरणपुर. बीमारी से मरे पशुओं के बारे में ग्रामीणों से जानकारी लेते कलेक्टर।

^मृत पशुओं को इधर-उधर ले जाने, खुले में डालने, बीमार पशुओं के पास स्वस्थ पशुओं को बांधने से भी वायरल फैलता है। हिसार की टीम की टीम ने शुक्रवार को प्रारंभिक रिपोर्ट और पूरी रिपोर्ट दो दिन बाद देने का आश्वासन दिया है। जिसे ज्यादा कारगर माना जाएगा। -डॉ. राजेंद्र सारड़ीवाल डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग श्रीगंगानगर।

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