पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • नगरपरिषद के 5 करोड़ के टेंडरों पर रोक, अभी नहीं सुधरने हालात

नगरपरिषद के 5 करोड़ के टेंडरों पर रोक, अभी नहीं सुधरने हालात

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीगंगानगर। डीएलबी ने नगर परिषद के जारी किए गए 5 करोड़ के टेंडरों पर रोक लगा दी है। विभाग के संयुक्त शासन सचिव निदेशक पुरुषोत्तम बियानी ने नगर परिषद आयुक्त को आदेश जारी कर कहा है कि टेंडरों की शिकायत विभाग तक पहुंची है। इसलिए 11 जनवरी को जारी की गई निविदा प्रक्रिया में यथा स्थिति बनाए रखते हुए अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाए।
साथ ही टेंडर से संबंधी सूचनाएं/ अभिलेख मय निविदा की मूल पत्रावली प्रेषित की जाए। निदेशक बियानी ने एडवोकेट रमजान अली चोपदार की ओर से स्वायत्त शासन मंत्री विभागीय उच्चाधिकारियों को टेंडर की शिकायत करने के बाद ये आदेश जारी किए हैं।

ठेकेदारों ने कर रखा था विरोध, मंत्री से भी की शिकायत

टेंडर जारी होने के बाद से अनेक ठेकेदारों ने परिषद प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल लिया था। ठेकेदारों ने अफसरों पर टेंडर जारी करने में कमीशनबाजी का आरोप लगाया। मंगलवार को ठेकेदारों ने पहले परिषद के बाहर धरना लगाया। फिर केन्द्रीय मंत्री निहालचंद को ज्ञापन सौंपकर ठेका निरस्त करने की मांग की। मंत्री को अवगत कराया कि परिषद अधिकारियों ने कुछ पार्षदों ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर ई-टेंडर जारी कर दिए। इन टेंडरों में अधिकतर ठेकेदार अपना फार्म तक सबमिट नहीं कर सके।
कब्जे हटने के बाद होने वाले सभी 37 निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी
शहर में अतिक्रमण अभियान के बाद तीन मुख्य मार्गों राधेश्याम कोठी मार्ग, सभापति चांडक कोठी मार्ग, नेशनल हाईवे पर मकानों दुकानों के आगे से अतिक्रमण हटाए गए थे, लेकिन इसके बाद से बजट के अभाव में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं हो सका। अब 501.30 लाख के टेंडर लगे थे। जिनमें सीसी सड़कें, नाली-पुलिया, इलेक्ट्रिक पोल, रिकारपेट, चैंबर, पेवर रोड, पार्कों का रखरखाव, इंटरलोकिंग टाइल्स सहित अन्य कार्य किए जाने थे। डीएलबी की रोक के बाद सभी टेंडरों पर आगामी आदेशों तक रोक रहेगी। यानी शहरवासियों की परेशानी यथावत बनी रहेगी।
12 के बजाए 26 जनवरी को किए फार्म अपलोड
ठेकेदारों का आरोप था कि परिषद के अधिकारियों ने अपने चेहते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ई-टेंडर जारी करने में सरकार के नियमों की अवहेलना की है। परिषद ने 11 जनवरी को 501.30 लाख के टेंडर जारी किए। इसमें 12 जनवरी से 1 फरवरी तक ऑनलाइन निविदा प्रपत्र डाउनलोड करने की बात कही गई, लेकिन परिषद ने 25 जनवरी तक निविदा डाउनलोड नहीं की। 26 27 जनवरी को निविदा डाउनलोड की गई। अगले दो दिन तक इसकी भनक ठेकेदारों को नहीं लगने दी गई। 30 31 जनवरी को परिषद में अवकाश रहा। वहीं, 1 फरवरी को सर्वर डाउन होने की वजह से अधिकतर ठेकेदार टेंडर फार्म नहीं भर सके।
परिषद अधिकारियों पर 3 बड़े आरोप
1. परिषद अधिकारियों ने ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया में वार्डवाइज कामों का तख्मीना नहीं दिखाया, जिससे ठेकेदारों में असमंजस रहा कि किस काम के लिए आवेदन करें।

2. टेंडर फाइल पर मुख्य लेखाधिकारी ने 11 जनवरी को लिखा था कि आगामी 1-2 वर्षों में सीवरेज का काम होने से सीसी रोड टूटने के कारण सीसी रोड के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।

3. टेंडर फाइल पर 501.30 लाख की वित्तीय प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं हुई। इसके बावजूद परिषद कर्मचारियों ने अपने स्तर पर टेंडर जारी कर दिए। उच्चाधिकारियों से परामर्श तक नहीं लिया गया।


खबरें और भी हैं...