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नहरी इलाकों में जल विवाद सुलझाने में मध्यस्थता ही सशक्त माध्यम- न्यायाधीश कोठारी
श्रीगंगानगर. श्रीगंगानगर,हनुमानगढ़ सहित प्रदेश के नहरी क्षेत्रों में जल वितरण को लेकर परस्पर विवादों का मध्यस्थता से हल निकालने के लिए जोधपुर में मंगलवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। एशिया फाउंडेशन सहित स्वयंसेवी संगठन लिब्रा इंडिया तथा लाइफ के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश डा.विनीत कोठारी ने की। उन्होंने कहा कि जल राष्ट्रीय संपदा है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादों को अदालती प्रक्रियाओं मेें उलझाने के बजाय आपसी मध्यस्थता से हल करने चाहिए। दक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात को ध्यान से सुने और संतुलित निर्णय को संप्रेषित करने का प्रयास करे। उन्होंने उदाहरण दिया कि पेट्रोल महंगा होने के कारण हम उसका उपयोग सावधानी से करते हैं, लेकिन पानी सस्ता या निशुल्क होने के कारण इसकी बर्बादी करते हैं।विशेष अतिथि डा.पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने कहा कि मध्यस्थता से विवादों को समाधान को लेकर सबके मन में कई आशंकाएं हो सकती हैं, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं कि यह एक सशक्त माध्यम है। एशिया फाउंडेशन की प्रतिनिधि प्रीती थापा ने नेपाल में मध्यस्थता के माध्यम से जल विवादों के निस्तारण की सफलता प्रैक्टिस पर प्रकाश डाला। इससे पहले लिब्रा इंडिया के प्रबंध न्यासी एडवोकेट संजीत पुरोहित ने श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित नहरी इलाकों में जल वितरण को लेकर होने वाले आम विवादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे विवाद स्थानीय स्तर पर मध्यस्थता से हल होते हैं तो सौहार्द बनाए रखा जा सकता है। संगोष्ठी में श्रीगंगानगर से अधिवक्ता हरजीतसिंह जाॅली तथा गुरचरणसिंह ने भी विचार रखे।
जस्टिस वनित कोठारी को स्मृति चिन्ह देते श्रीगंगानगर के एडवोकेट हरजीतसिंह जौली।