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डाउनलोड करेंश्रीगंगानगर। भारत-पाक बार्डर पर श्रीगंगानगर जिले के एक-दो लोग नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों के हजारों लोग बसे हैं। ये लोग उन गांवों में रहते हैं, जिन्हें आजादी से पहले मुसलमान परिवारों ने बसाया था। मुसलमानों के नाम पर गांवों का नाम पड़ा, लेकिन आज इन गांवों में एक भी मुसलमान नहीं है। खास बात यह है कि मुसलमानों द्वारा बसाए गए इन गांवों में हिंदू व सिख लोग रह रहे हैं और इन्होंने आज तक इन गांवों का नाम नहीं बदला। इन लोगों ने सही मायने में गण के तंत्र को समझा और उसकी रक्षा की।
यहां पर सांप्रदायिक तनाव तो दूर की बात, कई गांवों में हिंदू, सिख और मुसलमान एक साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं। कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां प्रेम की इबादत होती है। देखने में यह इमारत मस्जिद की लगती है, लेकिन श्री निशान साहिब इसके गुरुद्वारा होने का अहसास कराते हैं। हर सुबह यहां शबद-कीर्तन होता है। ऐसे गांव भी हैं जहां हिंदू और सिख परिवार रहते हैं और पीर बाबा का मेला भरता है।
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नोट- आगे की स्लाइड्स में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए हैं।
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