हनुमानगढ़। जिला अस्पताल में अब पित्ते की नली में मौजूद पथरी को निकालने के लिए ओपन ऑपरेशन नहीं होगा। नली से पथरी को निकालने के लिए अब लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी (दूरबीन से ऑपरेशन) की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी में मरीज के पेट को चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
केवल तीन छेद कर पित्ते की नली में मौजूद पत्थर को निकाला जाएगा। रविवार को जिला अस्पताल में हुई लेप्रोस्कॉपिक लाइव सर्जरी वर्कशॉप के साथ इस तकनीक की विधिवत शुरूआत की गई। इसमें प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य से आए विशेषज्ञों ने डॉक्टर्स को लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी के नए-नए तरीकों के बारे में बताया। खास बात रही कि वर्कशॉप का आयोजन अस्पता के सर्जन डॉक्टर्स ने खुद के खर्चे पर किया।
डॉक्टर बोले| नई तकनीक के बारे में जानकारी मिली
लाइव सर्जरी में लेप्रोस्कॉपी की नई तकनीक के बारे में नई जानकारी मिली है। इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिए। डॉ.डीसी खत्री, जिला अस्पताल
लेप्रोस्कॉपिकटेक्निक से सर्जरी और भी आसान हो चुकी है। सर्जरी का लाइव दिखाया गया, जिससे सर्जन को नई टेक्नीक का पता चला है। डॉ.एमपी शर्मा, पीएमओ
टाउन स्थित जिला अस्पताल में टीवी स्क्रीन पर चलती लाइव सर्जरी की वीडियो
लाइव सर्जरी में 12 ऑपरेशन किए गए। इसमें पित्ते की पत्थरी रोगियों के सात ऑपरेशन लेप्रोस्कॉपिक तकनीक से किए गए। वहीं एक ब्रेस्ट कैंसर, दो थाॅयराइड दो हर्निया रोगियों की ओपन सर्जरी की गई। वहीं एक रोगी को बीपी अधिक होने पर अनफिट कर दिया गया।
इन रोगियों को मिला फायदा
चंदासोनी, चंद्रकला शर्मा, रणजीत कौर, बीबी, जुबेदा, जमुना देवी, कुलविंद्र कौर का पित्ते की थैली का ऑपरेशन किया गया। बूटासिंह रामलाल की हर्निया की सर्जरी की गई। सुमित्रा देवी का ब्रेस्ट कैंसर अनिता कंवर और जीवन राम की थाॅयराइड की सर्जरी की गई। खास बात रही कि इन रोगियों के ऑपरेशन निशुल्क हुआ वहीं आवश्यक जांचें जो अस्पताल की लैब मंे नहीं हो सकती थीं, वो भी बाहर की लैब से आयोजन समिति की ओर से निशुल्क कराई गईं।
इन डॉक्टर्स का रहा योगदान
लाइव सर्जरी में रोहतक से वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. आरके कड़वासरा, बीकानेर से लेप्रोस्कॉपी सर्जन डॉ.एसपी चौहान, डॉ.राजेंद्र काजला डॉ. योगेंद्र, जयपुर से डॉ. भंवर यादव, एएसआई प्रेजीडेंट जयपुर डॉ. प्रभा ओम, डॉ. लक्ष्मीनारायण, प्रदीप वर्मा, डॉ. राजकुमार, हनुमानगढ़ के निश्चेतन विशेषज्ञ डॉ. डीसी खत्री, विजय छाबड़ा, जगदीश खत्री, तज्ञा बराड़, अजय मेहरड़ा, अशोक खाती, जगदीश खत्री,ओटी नर्सिंग स्टाफ जगन अरोड़ा, भादर राम, अरविंद जांगू, राजकुमार का योगदान रहा।
ब्रेस्ट कैंसर की ओपन सर्जरी के साथ ही नामचीन सर्जन्स में शामिल रोहतक के डॉ. प्रो. अारके कड़वासरा ने ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित सुमित्रा देवी की सर्जरी शुरू की तो ओटी में मौजूद दूसरे डाक्टर्स, सहयोगी ही नहीं कम्यूनिकेशन वार्ड में बैठे सर्जन भी अंगुली की एक-एक हरकत को दिलो-दिमाग में उतार रहे थे।
डॉ. कड़वासरा की ओर से अनिता कंवर और जीवनराम की थाॅयराइड की सर्जरी की गई। कुछ ऐसी ही दिलचस्पी जयपुर के डॉ. राजकुमार की की ओर से रोगी रामलाल बूटासिंह की सर्जरी के प्रति दिखी। इसलिए यह दोनों अॉपरेशन डॉक्टर्स के लिए एकेडमिक कार्यक्रम में महत्वपूर्ण थे। खास बात है कि लाइव सर्जरी वर्कशॉप में पित्ते की पत्थरी के सात और हर्निया के दो ऑपरेशन लेप्रोस्कॉपिक पद्धति से किए गए जो इससे पहले हनुमानगढ़ में नहीं हुए थे।
गले में थायराइड की गांठ के निस्तारण की बारीकियां डाॅ.आरके कड़वासरा ने सिखाई। कुल मिलाकर जिला अस्पताल का ओटी यहां के सर्जन डॉक्टर्स के लिए लेप्रोस्कॉपिक सर्जरी की पाठशाला बन गया। ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर्स ब्रेस्ट, थायराइड लेप्रोस्कॉपी सर्जरी करते रहे और इसका लाइव ऑपरेशन थिएटर के पास ही वार्ड में बैठे डॉक्टर्स का पैनल डिस्पले स्क्रीन पर देखकर इंटरेक्शन करते रहे। इसके लिए दो डिस्पले स्क्रीन लगाई गई थीं।