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जिले में स्वाइन फ्लू से दो और लोगों की मौत

6 वर्ष पहले
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हनुमानगढ़/पीलीबंगा. जिले के रोड़ावाली गांव निवासी एक व्यक्ति की बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में स्वाइन फ्लू से मौत हो गई है। इसके साथ पीलीबंगा निवासी एक महिला की भी मौत हो गई। ये दोनों मौतें जिले से बाहर हुई हैं लेकिन मृतकों का दाहसंस्कार पैतृक जगह पर करने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है और दोनों के संपर्क में आने वाले लोगों को टेमी फ्लू टेबलेट दी गई हैं।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक स्वाइन फ्लू की चपेट में आने वाला रोड़ावाली निवासी रामलाल (48 वर्ष) पुत्र शेरा राम कैंसर से पीड़ित था और लंबे समय से पीबीएम के कैंसर वार्ड में भर्ती था। फेफड़े और लीवर में कैंसर फैलने के कारण उसकी हालत गंभीर थी। आठ फरवरी को उसकी स्वाइन फ्लू की जांच करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
मृतक को दाहसंस्कार के लिए रोड़ावाली लाया गया। बीकानेर से सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची और मृतक के संपर्क में आने वाले परिजनों और अन्य लोगों को सुरक्षा उपाय के तौर पर टेमी फ्लू की टेबलेट दी गई। दूसरा मामला पीलीबंगा में सामने आया है जो स्वाइन फ्लू संभावित रोगी थी। जानकारी के मुताबिक मृतका कुलवंत कौर (40 वर्ष) पत्नी दर्शनसिंह छिंपा मूल रूप से पीलीबंगा के वार्ड नंबर 17 की निवासी थी।
रोड़ावाली निवासी व्यक्ति की स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि हुई है। पीलीबंगा में महिला की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। दोनों मामलों में सतर्कता बरतते हुए संपर्क में आने वाले लोगों को टेमीफ्लू की टेबलेट्स दी गई और इनके स्वास्थ्य की जांच भी की गई है। डॉ.प्रीत मोहिंदर सिंह, सीएमएचओ

मृतका कुलवंत कौर को स्वाइन फ्लू होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सूचना मिलने के बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। स्वाइन फ्लू संभावित की मौत की सूचना मिलते ही पीलीबंगा सरकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ. हरिओम बंसल अपनी टीम के साथ मृतका के घर पहुंच गए और अन्य परिजनों के स्वास्थ्य की जांच की।
परिजनों के अलावा संपर्क में आने वाले लोगों को भी टेमी फ्लू की टेबलेट दी गई। मृतका की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल पाई है। डाक्टर्स का कहना है कि जयपुर से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता लग पाएगा। उधर, रोड़ावाली गांव में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर टेमी फ्लू की टेबलेट वितरित की हैं।

वर्तमान में कुलवंत कौर अपने पति के साथ सूरतगढ़ थर्मल स्टेशन में रह रही थी। कुलवंत कौर को कुछ दिन पहले खांसी-जुकाम बुखार की शिकायत होने पर उसका इलाज सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट के हास्पिटल में शुरू करवाया गया। रोग का इलाज नहीं होने पर कुलवंत कौर को सूरतगढ़ के एक निजी हास्पिटल में दिखाया गया। स्थिति बिगड़ने पर उसे श्रीगंगानगर रैफर किया गया और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। रास्ते में मौत होने के बाद कुलवंत कौर को श्रीगंगानगर ले जाया गया और स्वाइन फ्लू का सैंपल दिया गया। मृतका का मूल निवास पीलीबंगा होने के कारण शव यहां लाकर दोपहर को दाहसंस्कार कर दिया गया।

स्वाइन फ्लू यानी एच1 एन1 वायरस। यह वायरस सबसे पहले सूअरों में पाया गया लेकिन अब यह इंसान से इंसान में फैलता है। सूअरों से इसका कोई संबंध नहीं रह गया है। इसराइल में इसे मैक्सिकनफ्लू थाईलैंडमें नॉर्थअमेरिकन फ्लू कहतेहैं। यह सर्दी में ज्यादा सक्रिय होता है।

लाश से भी इन्फेक्शन| घर में रखी लाश अौर उसको नहलाने से भी वायरस फैल सकता है। उसके कपड़े आधे घंटे तक पानी में उबालें।

सर्दी या जुकाम की परेशानी है तो भीड़भाड़ से बचकर रहें।
तेज बुखार, गले मे खराश है तो अनदेखी नहीं करें।

साबुन से बार-बार हाथ धोने, सेनिटेशन पर ध्यान देने से वायरस से बच सकते हैं।

ये दवाएं कारगर | समय पर टेमी फ्लू दवा लेने पर रिस्क कम हो जाता है। वेक्सीनेशन ट्रायवेलेंट और टैट्रावेलेंट उपलब्ध हैं।

5-10 दिन में असर

इन्फेक्टेड होने पर स्वाइन फ्लू का वायरस 5 से 10 दिन के बीच पूरा असर करता है।