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अब श्रीगंगानगर में ही निशक्त बनेंगे सशक्त

6 वर्ष पहले
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अंगोंके अनुवांशिक टेढ़ेपन या किसी दुर्घटना में खोए हुए अंगों के कारण बेबसी की जिंदगी जी रहे लोग बिना किसी कीमत के अपने शहर में ही खोए अंग पा सकेंगे। शहर में पहली बार जगदंबा अंध विद्यालय में विकलांग पुनर्वास संस्थान शुरू हुई, जिसमें निशक्त लोगों के लिए कृत्रिम अंगों का प्रत्यारोपण ही नहीं बल्कि अंग बनाए भी जाएंगे।

अब तक यह सुविधा हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर दोनों ही जिलों में नहीं थी। इस कारण निशक्त लोगों को उपचार कृत्रिम अंग के लिए जयपुर, उदयपुर, लुधियाना और नई दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था। संस्थान के प्रोस्थेटिस्ट एंड आर्थोटिस्ट शुभम भारद्वाज बताया कि निशक्त के खोए हुए अंगों की माप लेकर ट्रेंड स्टाफ से अंग को संस्थान में ही बनवा कर इंस्टॉल किया जाएगा। रविवार को उद्घाटन के दिन ही 20 से अधिक लोग संस्थान में अंग के लिए पहुंचे और शाम तक 12 लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन भी कराया। इसमें अग्रसेन नगर निवासी दस साल की डॉली ने 15 दिन पहले से आवेदन कर रखा था। रविवार को तैयार हुआ अंग मुख्य अतिथि निहालचंद मेघवाल ने भेंट किया। इस मौके पर विधायक गुरजंट सिंह बराड सभापति अजय चांडक मौजूद रहे।