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आदेश वापिस नहीं लिया जाता तब तक बंद रहेंगी जिनिंग मिलें
प्रदेशसरकार खल पर रिवर्स टैक्स लगाकर इस उद्योग को तबाह करने पर तुली हुई है। राजस्थान कॉटन जिनर्स एसोसिएशन सरकार के इस रवैये का विरोध करती है और इस आदेश को वापिस लेने तक मिलें बंद रखी जाएंगी। यह बात व्यापारी नेता राजकुमार हिसारिया ने सोमवार को टाउन स्थित फूडग्रेन धर्मशाला में राजस्थान कॉटन जिनर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। हिसारिया ने बताया कि खल टैक्स फ्री आइटम्स में शामिल है लेकिन अब मिल मालिकों को 2006-07 से रिवर्स टैक्स के नोटिस पकड़ाए जा रहे हैं। उनके खाते सीज किए जा रहे हैं। इस कारण मजबूरन मिल मालिकों को टैक्स की कुछ राशि भरनी भी पड़ रही है लेकिन सरकार के रवैये का विरोध जारी है। रिवर्स टैक्स का आदेश लिए जाने तक मिलें बंद रहेंगी। इस मौके पर राजस्थान कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के प्रेमरतन पेड़ीवाल, राजकुमार अग्रवाल, वेगराज, राजेंद्रकुमार चाचाण आदि मौजूद थे।
ट्रिब्यूनलमें विचाराधीन है मामला : राजकुमारहिसारिया ने बताया कि खल पर रिवर्स टैक्स लगाने के विरोध में जिनर्स एसोसिएशन की ओर से अपील की गई थी। यह मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। इसी बीच हाई कोर्ट में एक अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी के मामले को आधार बनाकर खल पर रिवर्स टैक्स लागू कर दिया गया। इस कारण हनुमानगढ़ श्रीगंगानगर के व्यापारियों पर करीब 50 करोड़ की राशि बकाया हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले ही कुल डिमांड की महज पांच प्रतिशत खल का उत्पादन होता है। बाकी खल दूसरे राज्यों से आती है। इन राज्यों में खल पर टैक्स नहीं है। ऐसे में प्रदेश के खल उद्योग को तबाह करने की साजिश रची जा रही है। व्यापारियों ने कहा कि खल सरसों के तेल का बाय प्रोडक्ट है। तेल पर पहले से ही टैक्स लगाया जाता है। ऐसे में खल पर टैक्स लगाना गलत है।
हनुमानगढ़. प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के सदस्य।