उन्होंने कहा कि साढ़े तीन माह से श्रमिकों को वेतन नहीं मिल रहा है लेकिन सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जब तक स्पिन फैड के सीएमडी हनुमानगढ़ आकर श्रमिकों से वार्ता नहीं करेंगे, तब तक महापड़ाव जारी रहेगा।
शाम करीब पांच बजे कांग्रेस के पूर्व सांसद मास्टर भरतराम मेघवाल माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल के नेतृत्व में श्रमिक नेताओं का एक शिष्टमंडल कलेक्टर से मिला और कलेक्टर ने सीएमडी और मुख्य शासन सचिव से फोन पर बात की। कलेक्टर ने सीएमडी को हनुमानगढ़ आने का आश्वासन दिया। इसके बाद श्रमिक नेताओं ने महापड़ाव समाप्त करने की घोषणा की। इस मौके पर माकपा नेता रामेश्वर वर्मा, प्रधान जयदेव भिड़ासर, प्रो. सुमन चावला, दुर्गा स्वामी, सौरभ राठौड़, गुरदीप चहल, एडवोकेट रघुवीर वर्मा, पूर्व पार्षद मनोज विनोचा, कर्मचारी नेता महावीरसिंह राठौड़, नसीब खां, रामकुमार, श्यामसिंह भाटी एडवोकेट विजयसिंह चौहान आदि मौजूद थे।
हनुमानगढ़ श्रमिकों के साथ भेदभाव क्यों: बेनीवाल
हेतरामबेनीवाल ने कहा कि सरकार मिल के श्रमिकों के साथ भेदभाव क्यों कर रही है। जबकि गुलाबपुरा गंगापुरा के श्रमिकों को वेतन दिया जा रहा है लेकिन यहां के श्रमिकों को 3 माह से वेतन नहीं मिल रहा है।
सीएमडी आकर बता दें मिल चलेगी या नहीं: वर्मा
माकपा नेता रामेश्वर वर्मा ने कहा कि स्पिन फैड के सीएमडी हनुमानगढ़ आकर यह स्थिति साफ कर दें कि मिल चलेगी या नहीं। अगर नहीं चलेगी तो श्रमिकों के वेतन का भुगतान कैसे किया जाएगा।
आयुक्त और आईजी पहुंचने से पहले शांत हुआ मामला
महापड़ाव को देखते हुए संभागीय आयुक्त और आईजी गिर्राज मीणा शाम को हनुमानगढ़ पहुंचे लेकिन उससे पहले ही कलेक्टर रामनिवास एसपी गौरव यादव ने श्रमिक नेताओं के साथ वार्ता करके मामला शांत कर दिया था।
तीन मुख्य मुद्दों पर अड़े रहे श्रमिक नेता
1. पहले स्पिनिंग मिल श्रमिकों को प्रबंधन तीन माह के बकाया वेतन का भुगतान करे।
2.मिल शुरू करने के लिए हनुमानगढ़ स्पिनिंग मिल की राशि वापस लौटाई जाए।
3.स्पिन फैड के सीएमडी को श्रमिक नेताओं से वार्ता के लिए हनुमानगढ़ बुलाया जाए।
श्रमिक कलेक्ट्रेट के अंदर जाना चाह रहे थे लेकिन उन्हें सड़क पर ही रोक दिया गया। इसका श्रमिक नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया। एक बार स्थिति काफी तनाव पूर्ण हो गई। श्रमिक नेताओंं और पुलिसकर्मियों में धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में एएसपी निर्मला बिश्नोई, डीएसपी अत्तरसिंह पूनिया, एसडीएम राजेश कुमार, जंक्शन सीआई रणवीरसिंह मीणा टाउन सीआई पुष्पेंद्रसिंह ने स्थिति को संभाला। इसके बाद सभी श्रमिक वहीं सड़क पर धरना लगा कर बैठ गए।
श्रमिकों की पीड़ा|साढ़े तीन माह से वेतन नहीं मिला बच्चों की फीस कहां से भरें
श्रमिकों का कहना था कि साढ़े तीन माह से स्पिनिंग मिल बंद चल रही है। उन्हें कोई वेतन भी नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि बच्चों के स्कूल की फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं है लेकिन उनकी पीड़ा कोई नहीं सुन रहा है। तीन माह से सरकार सिर्फ विचार कर रही है, जबकि उनकी स्थिति दयनीय हो चुकी है। अब तो हर जुबां पे एक ही सवाल है कि आखिर, मिल बंद हो जाएगी क्या पूरी मिल में अनिश्चितता की स्थिति है। मजदूरों के सवाल का जवाब किसी के पास नहीं। मिल बंद होने के बाद उनका क्या होगा, इसको लेकर भी कोई ठोस निर्णय नहीं हो पा रहा। सिर्फ मजदूर ही नहीं, स्टाफ में भी जिंदगी को लेकर असमंजस की स्थिति है। सरकार का क्या निर्णय होगा, पता नहीं।
कलेक्ट्रेट से लेकर पानी टंकी तक तैनात कर दी पुलिस
श्रमिकों के महापड़ाव का खौफ इतना था कि कलेक्ट्रेट को पुलिस छावनी बना गई थी। स्थिति यह थी कि कलेक्ट्रेट से लेकर पानी टंकी के नीचे भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था जिससे कोई पानी की टंकी पर चढ़ सके। यही नहीं कलेक्ट्रेट चेंबर के आगे लगे चैनल ताला बंद कर दिया गया था जिससे श्रमिक एक साथ कलेक्टर चेंबर में जा सके।
...और छलके उठे आंसू
स्पिनिंग मिल शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों की माली हालत पर बोलते हुए कांग्रेस के नेता सौरभ राठौड़ के आंखों से आंसू छलक पड़े।
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