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पंचायती राज में अच्छी शैक्षिक योग्यता वाले जनप्रतिनिधि चुने गए

6 वर्ष पहले
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछली बार चुनाव के बाद पंचायती राज के सभी जनप्रतिनिधियों को मिलाकर कुल 1074 जनप्रतिनिधि निरक्षर थे। इनमें से करीब आठ सौ जनप्रतिनिधियों को पांच साल के दौरान साक्षर भी किया गया। अभी पंच सरपंच के आंकड़े पूरी तरह उपलब्ध नहीं हुए हैं लेकिन सरकार द्वारा बनाए गए नए नियम से यह तो तय है कि कोई जनप्रतिनिधि निरक्षर नहीं होगा। कई जगह अच्छी शैक्षिक योग्यता वाले लोग सरपंच पंच बने हैं। सरपंचों की बैठक ले चुके अधिकारियों के मुताबिक इस बार सरपंचों की शैक्षिक योग्यता अच्छी है और इनमें भी महिला सरपंचों की योग्यता पुरुषों से बेहतर है।

नगर संवाददाता| हनुमानगढ़

पंचायतीराज चुनाव में शैक्षिक योग्यता का नियम लागू करने का असर नजर रहा है। इस बार पंचायत समितियों जिला परिषद में पढ़े-लिखे सदस्य नजर आएंगे। अच्छी शैक्षिक योग्यता वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने के कारण जिला परिषद पंचायत समिति के सदस्य युवा ही हैं। शिक्षित महिला जनप्रतिनिधि घूंघट में दिखाई नहीं देंगी और सदन में भी खुलकर अपनी बात रख सकेंगी।

यहहै अब शैक्षिक स्थिति

राज्यसरकार ने पंचायत समिति जिला परिषद सदस्य के लिए दसवीं की शैक्षिक योग्यता निर्धारित की थी। इस नियम के बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। जिला परिषद के 29 में से सिर्फ 12 सदस्य मैट्रिक पास हैं। इसके अलावा चार सदस्य पोस्ट ग्रेजुएट, आठ ग्रेजुएट, दो एलएलबी, एक बीए बीएड, एक 12वीं एक सदस्य 11वीं पास है। इसी तरह जिले की सात पंचायत समितियों में कुल 143 सदस्यों में से 62 सदस्य दसवीं पास हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सातों पंचायत समितियों में कुल 16 सदस्य पोस्ट ग्रेजुएट, 29 सदस्य ग्रेजुएट, दो एलएलबी, तीन बीएड 31 सदस्य 12वीं पास हैं।

लेकिनजीत के लिए शैक्षिक योग्यता ही नहीं एकमात्र पैमाना

जनप्रतिनिधियोंकी शैक्षिक योग्यता में इजाफा जरूर हुआ है लेकिन चुनाव मैदान में योग्यता का एकमात्र पैमाना डिग्री ही नहीं है। कई पंचायत समिति ब्लॉक्स और जिला परिषद जोन में दसवीं पास प्रत्याशियों ने ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ा है। ऐसे में लोगों से जुड़ाव, जनसेवा और पार्टी ही वोटर्स के लिए सबसे अहम है।

^इसबार चुने गए जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता अच्छी है। सरपंचों की बैठकों में भी यह अनुभव किया कि जनप्रतिनिधि बेहतर तरीके से अपनी बात रख पा रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार चुनी गई महिला सरपंचों की शैक्षिक योग्यता पुरुष सरपंचों से अधिक है। रामनिवासजाट, सीईओ, जिला परिषद