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सरपंच पति ने कामकाज में हस्तक्षेप किया तो हो सकता है मामला दर्ज

6 वर्ष पहले
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महिलासरपंचों की जगह उनके पति या परिजनों की हुकूमत पर रोक लगाने के लिए जिला परिषद की ओर से विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट ने बताया कि सभी बीडीओ, सचिवों ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों को तत्परता से रोकना जरूरी है। सभी अधिकारियों को कहा गया है कि ऐसी शिकायत प्राप्त होने पर वे प्राथमिकता से अनाधिकृत व्यक्तियों के सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप पर रोक लगाएं। जाट ने बताया कि सरपंच की सीट पर बैठकर कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति पंचायत के काम में दखल देता है तो ग्रामीण फोटो लेकर मय सबूत इसकी शिकायत बीडीओ या सीधे जिला परिषद सीईओ को कर सकते हैं। सभी सरपंचों को भी इस आशय की सूचना दी गई है और इस कार्य में कोताही बरतने वाले ग्राम सचिव या सरकारी कर्मचारी पर भी निर्देशों की अवहेलना की कार्रवाई की जा सकती है।

दर्जहो सकता है मामला

जारीदिशा-निर्देश के मुताबिक अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों को निर्देश देने पर ऐसी घटना को लोकसेवक (सरपंच) का प्रतिरूपण मानकर आरोपी के खिलाफ दंड संहिता की धारा 170 के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। आरोप सिद्ध होने पर दो साल की सजा का प्रावधान है। सीईओ ने अनाधिकृत रूप से निर्देश देने वाले व्यक्ति पर ऐसी ही कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।