स्कूलों में गठित होंगी कमेटियां
कार्यस्थलपर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए बने कानून के तहत अब सभी स्कूलों में भी आंतरिक शिकायत समितियों का गठन किया जाएगा। लैंगिक उत्पीड़न जैसी घटना होने की दशा में कर्मचारी अपनी समस्याएं कमेटी के समक्ष रख सकेंगी। खास बात यह है कि इस कमेटी में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं ही होंगी। महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के तहत यह निर्देश जारी किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी डीईओ को इन आदेशों की पालना करने के लिए लिखा है।
यहहोगा कमेटी का प्रारूप
कमेटीकी अध्यक्ष कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर पर कार्यरत महिला कर्मचारी होगी। कार्यालय में ऐसे पद पर महिला कर्मचारी होने पर संबंधित संस्था के अन्य कार्यालय की महिला को अध्यक्ष बनाया जाएगा। समिति में दो ऐसे सदस्यों को शामिल किया जाएगा जो महिलाओं से संबंधित विषयों के प्रति कार्य करने के अनुभवी हों और सामाजिक कार्य कानूनी जानकारी रखते हों। इसके अलावा एक सदस्य स्वयंसेवी संस्था से होगा जो यौन शोषण के मुद्दों पर पूरी जानकारी रखता हो।
पहलेट्रांसजेंडर्स के लिए भी आए थे निर्देश
संस्थानोंमें लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए पहले ट्रांसजेंडर्स के लिए इसी तरह की कमेटी के गठन के निर्देश जारी किए गए थे। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कमेटियों के गठन के निर्देश संस्था प्रधानों को जारी किए गए हैं।
^निदेशालयसे कमेटी गठन के निर्देश मिले थे। सभी संस्था प्रधानों को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। संस्था प्रधानों से कमेटी गठित कर पालना रिपोर्ट जमा करवाने के लिए भी कहा गया है। पीसी जाटोलिया, डीईओ(माध्यमिक)