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प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी पहचान बना रही हैं हिंदी

7 वर्ष पहले
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बच्चों को बताया राष्ट्रभाषा का महत्व

अखिलभारतीय साहित्य परिषद श्री जय लक्ष्मी साहित्य कला एवं नाटक मंच की ओर से रविवार को हिंदी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मंच के कला भवन में ‘वर्तमान में हिंदी की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन वरिष्ठ कवि निशांत की अध्यक्षता में किया गया। परिचर्चा मे सर्वप्रथम कवि बलविंद्र भनोत ने कहा कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया राजनेताओं के भाषणों ने हिंदी के विकास में अच्छा योगदान दिया है। लेखक विजय बवेजा ने कहा कि हिंदी भाषा के बिना हमारे देश की उन्नति संभव नहीं है। हिंदी साहित्य, कला संस्कृति की भाषा के रूप में विकसित है तथा वर्तमान में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी तेजी से पहचान बना रही है। व्याख्याता कुंदन चेतवानी ने कहा कि हिंदी जैसा लचीलापन किसी भाषा में नहीं है। नवदीप भनोत ने गजल ‘सगी बहनों का रिश्ता है जो उर्दू- हिंदी में, कहीं दुनिया की दो जिंदा जुबानों में नहीं मिलता’ सुनाकर हिंदी भाषा की महिमा पेश की। अधिवक्ता अर्जुनसिंह शेखावत ने हिंदी भाषा के विस्तार पर जानकारी देते हुए इसे हर्ष का विषय बताया। गोष्ठी का संचालन विजय बवेजा ने किया।

संगरिया. प्रतियोगिता में भाग लेते छात्र।