जयपुर. राजस्थान यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं के लिए भरे गए परीक्षा फार्मों में अगर किसी छात्र ने परीक्षा फार्म में त्रुटि के कारण दूसरा फार्म जनरेट करके ई मित्र चालान के साथ हार्डकॉपी सबमिट की है तो ऐसे छात्र को एक हजार रुपए जुर्माना चुकाना पड़ेगा।
तभी आवेदन मान्य माना जाएगा। इस संबंध में यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग ने दिशा निर्देश जारी किए है। यूनिवर्सिटी में ऐसे मामलों की संख्या करीब 600 है और यूनिवर्सिटी आवेदकों से एक-एक हजार रुपए जुर्माना चार्ज कर रही है।
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन में एक हजार रुपए की पेनल्टी जमा कराने के लिए दौसा, अलवर, भरतपुर सीकर, झुंझुनूं तक के छात्र आ रहे है। छात्रों का कहना है कि उन्हें एक पत्र मिला था जिसमें बुधवार को जुर्माना राशि जमा कराने की अंतिम तिथि दर्शाई गई थी। इसी कारण जैसे-तैसे जयपुर पहुंचे है। इस पत्र में कहा गया है कि अगर एक हजार रुपए की जुर्माना राशि नहीं चुकाई तो परीक्षा से वंचित कर दिए जाएंगे।
पूरी जानकारी अपडेट नहीं की, फार्म बार-बार जनरेट हुआ, हो गई गलती
छात्रों का आरोप है कि ई मित्र पर
आरयू ने पूरी तरह से इंफॉरमेशन अपडेट नहीं की थी। इस कारण से दो से तीन बार फार्म जनरेट करने पड़े। इसके अलावा कई मामलों में विषय या नाम में स्पेलिंग मिस्टेक हुई । इस बीच छात्र ने ई मित्र से फीस का चालान बनवा लिया था। स्पेलिंग मिस्टेक या विषय चुनने की गलती का पता चालान बनवाने के बाद पता चला तो छात्रों ने दोबारा से फार्म जनरेट भी किए। अब फार्म पर अंकित संख्या और चालान में अंकित संख्या में फर्क आरयू कर्मियों को हार्डकॉपी में मिला तो छात्रों पर जुर्माना लगाया गया।
भास्कर का सवाल- पहले क्यों नहीं बताया, जवाब- पैनल्टी मिसमैच पर है
परीक्षार्थियों से हार्ड कॉपी जांचने के बाद स्वीकारी गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि फार्म में कमियां थी तो इसे नजरअंदाज करके क्यों स्वीकारा गया? इस संबंध में कोई गाइडलाइन क्यों जारी की? भास्कर के इन सवालों के जवाब में परीक्षा प्लानिंग के संयोजक प्रो. एसएल शर्मा ने कहा- छात्रों ने जनरेटेड फार्म यूनिवर्सिटी में बतौर हार्ड कॉपी सबमिट किया है, यूनिवर्सिटी ने उसी आवेदन फार्म को आधार माना है।
इसके साथ जो ई मित्र का चालान है, वो दूसरे परीक्षा फार्म के नंबर से मेल खा रहा है। इस कारण मिसमैच की प्रॉब्लम हुई है। यानी हमारी नजर में फीस जमा नहीं है। फीस जमा नहीं होने पर छात्रों को परीक्षा से वंचित करने का प्रावधान है। लेकिन हमने छात्रों को परीक्षा से वंचित करने की बजाय एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।