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2.37 करोड़ रुपए पर फिरा पानी, काम आने से पहले ही दवाएं खराब

8 वर्ष पहले
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जयपुर. निशुल्क दवा योजना ने निश्चित ही आमजन को बड़ी राहत दी, लेकिन योजना को लागू करने में मैनेजमेंट के स्तर पर अफसरों की लापरवाही भी खूब रही। दवा और मेडिकल आइटम्स की संख्या बढ़ाने के साथ ही एक ओर तो इनकी कम सप्लाई ने मरीजों को परेशान किया, वहीं अब सामने आया कि कई दवाएं तो अस्पताल और मरीजों तक पहुंचने से पहले ही अवधि पार हो गईं।

राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) ने हाल ही तैयार की सूची मुताबिक प्रदेश में 2 अक्टूबर, 2011 से 31 अक्टूबर, 2013 तक कुल 2 करोड़ 37 लाख रुपए की दवाइयां और मेडिकल आइटम्स तो गोदाम में ही खराब या अवधिपार हो गए, जिनकी अब कोई उपयोगिता नहीं। खास बात यह भी कि इसमें राजधानी के डिस्ट्रिक ड्रग वेयरहाउस (डीडी-डब्ल्यू-1) में ही डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा की दवाएं शामिल हैं, जो काम नहीं आ सकीं।

इन दवाओं पर डेढ़ से दो साल की एक्सपायरी थी, लेकिन कुछ की खरीद ही जरूरत से ज्यादा कर ली गई, वहीं कुछ मामलों में दवाओं का डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर भी खामियां बताई जा रही हैं। संबंधित दवा कंपनियों से हुए समझौते मुताबिक एक्सपायर्ड दवाओं की जिम्मेदारी आरएमएससीएल की ही थी। ऐसे में अब इन्हें साइंटिफिकली डिस्पोज करने के अलावा कोई चारा नहीं है। इस बारे में आरएमएससीएल के बोर्ड में निर्णय भी किया जा चुका। प्रदेशभर के डीडी-डब्ल्यू से खराब हुई दवाओं को इकट्ठा कर जल्द ही डिस्पोज किया जाएगा।

कुछ दवाएं तो एक साथ ही इतनी खरीद ली कि रखने की जगह नहीं थी
संबंधित अफसरों ने कुछ दवा कंपनियों से एक साथ दो साल का माल खरीद लिया, जबकि इन्हें त्रैमासिक या छमाही पर खरीदना था। इससे इन्हें सुरक्षित रखने का ही संकट खड़ा हो गया। इससे दूसरी दवाओं को रखने में परेशानी हुई और उनके लिए निजी गोदाम किराए पर और लेने पड़े। तब समस्या इनको वहां सुरक्षित रखने की खड़ी हुई, क्योंकि ऐसी जगहों पर दवाओं को प्रॉपर टेम्प्रेचर में रखने की व्यवस्थाएं भी नहीं थीं। इससे दवाइयां खराब हुईं। किराए का भार पड़ा सो अलग।

डिमांड-सप्लाई का आकलन गलत रहा या जानबूझकर की खरीद
दवाओं की खासकर राजधानी के डीडी-डब्ल्यू में ही डेढ़ करोड़ की एक्सपायरी ने कई सवाल खड़े कर दिए। मसलन दवाओं की खरीद से पहले उनकी मांग और सप्लाई का सही आकलन करने में कहां चूक रही। क्या दवाओं की मांग के बावजूद दवाएं गोदाम से बाहर नहीं निकली? क्योंकि अक्सर सप्लाई की कमी को लेकर सवाल उठते रहे थे। इसके अलावा क्या जानबूझकर कुछ दवा कंपनियों से बगैर किसी आकलन के जरूरत से ज्यादा दवाएं खरीदी गईं।

कमेटी से जांच करा सुधार होंगे
आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक सुनील धारीवाल ने बताया कि दो साल में निशुल्क दवा योजना के अंतर्गत जयपुर के डीडी-डब्ल्यू-1 में एक करोड़ 54 लाख और प्रदेश में 2 करोड़ 37 लाख की दवाएं काम आने से पहले खराब (अधिकतर एक्सपायर या अन्य कारणों से) हुई हैं। योजना का शुरुआती चरण था, इसलिए भी आकलन में चूक हो सकती है। फिर भी योजना में और सुधार के लिए प्रयास करेंगे, ताकि नुकसान कम से कम हो। जहां दवाएं ज्यादा मात्रा में खराब हुई (खासकर जयपुर का ड्रग वेयरहाउस जहां कुल सप्लाई का 1.33 प्रतिशत) वहां कारणों का पता लगाने के लिए कमेटी बनाएंगे।