जयपुर. प्रदेश में पिछले एक साल के दौरान लगातार चुनावों के कारण आचार संहिता लगने और अन्य कारणों से तबादलों पर रोक रही। राज्य में दो लाख से ज्यादा शिक्षक, डॉक्टर, कर्मचारी तबादलों पर लगी रोक हटने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए कुछ विभागों ने मंत्री स्तर पर गुपचुप तरीके से तबादला सूचियां तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 41 विभागों की मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे होने के कारण संबंधित डिपार्टमेंट आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
लेकिन मुख्यमंत्री ने शनिवार को उपचुनाव में हार पर भाजपा की मंथन बैठक के दौरान खुद स्वीकार किया कि आचार संहिता के कारण लगातार लंबे समय तक तबादलों पर रोक रही। कुछ हद तक निचले स्तर पर कर्मचारियों में नाराजगी भी इसका कारण हो सकता है। शिक्षा विभाग में मंत्री के पास ही कुछ माह पहले 45 हजार से अधिक तबादला अर्जियां आ चुकी हैं। लेकिन आचार संहिता और रोक नहीं हटने से तबादले अटके हुए हैं। शिक्षा सहित कुछ विभागों का कहना है कि नवरात्रा के बाद तबादलों से रोक हटने के आसार हैं। लेकिन सरकार के स्तर पर इस मामले में फिलहाल कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ विभागों में अंदरखाने तबादलों की सुरसुरी के कारण कर्मचारी और शिक्षकों के जयपुर के चक्कर पिछले दो दिन में अचानक बढ़ गए हैं।
पीए अज्ञात स्थानों पर बना रहे हैं तबादला सूचियां
चिकित्सा मंत्री राजस्थान से बाहर है। लेकिन कुछ विभागों के मंत्रियों ने अपने पीए को कंप्यूटर के साथ अज्ञान स्थान पर भेज दिया है। वे पिछले दो दिन से तबादला सूचियां तैयार कर रहे हैं। शिक्षा विभाग में भी अंदरखाने यही हो रहा है, लेकिन एकीकरण की प्रक्रिया को लेकर मंत्री पर दबाव बढ़ने के कारण फिलहाल यह साफ नहीं किया जा रहा है कि तबादलों पर रोक कब से हटेगी।
शिक्षा विभाग : स्कूलों के एकीकरण की आपत्तियों का निस्तारण अभी नहीं हो पाया है। इस करण से समानीकरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समानीकरण के बाद तबादले संभव हो सकेंगे। ऐसे में तबादलों में देरी तय है। दीपावली के आसपास की तबादलों पर रोक हटने के आसार है। इस बार तबादलों के लिए नीति बनाई जा रही है। अभी नीति को भी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उधर तबादलों की आस में शिक्षक करीब 40 हजार डिजायर विभाग में जाकर थमा चुके है।
वाणिज्य कर विभाग : यह महकमा भी मुख्यमंत्री वसुंधरा ही संभालती हैं। यहां तो अगल-अलग कैडरों में करीब 3 साल से भी ज्यादा समय से तबादला सूची जारी नहीं हुई। इसमें करीब 80 सीटीओ, 200 एसीटीओ तथा इनके नीचे भी तबादले के लिए लंबे समय से इंतजार चल रहा है। मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस विभाग में जो थोड़े बहुत तबादले हुए भी हैं वह खाली पदों को भरने के लिए किए गए थे।
ट्रांसफर लिस्ट तैयार, प्रतिबंध हटने का इंतजार
पंचायती राज विभाग ने तबादला नीति के तहत एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय से काम कर रहे कर्मचारियों का ट्रांसफर करने का फैसला किया है। तीन वर्ष की अवधि की गणना 1 अप्रैल, 2014 से की गई है। इसके आधार पर विभाग ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों, पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों व ब्लॉक स्तर के प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों से ऐसे कर्मचारियों की सूची मंगा ली है। विभाग राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण से प्रतिबंध हटने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के महकमों को तबादलों का इंतजार
वन विभाग में मार्च में करीब 50 लोगों के तबादले हुए थे। इसके बाद से यहां अब तक कोई ट्रांसफर सूची जारी नहीं हुई है। यह विभाग मुख्यमंत्री संभालती हैं। हालांकि विभाग की तबादला नीति 2011 में जारी हो गई थी। आबकारी विभाग भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ही महकमा है। इसमें भी तबादलों की जरनल लिस्ट जारी हुए लंबा समय हो चुका है। हालांकि सरकार के स्तर पर समय समय पर जरूरत के हिसाब से छोटी-छोटी ट्रांसफर लिस्ट जारी की गई है। विभाग में जिला आबकारी स्तर के करीब 48 तथा आबकारी निरोधक दल के करीब 50 अधिकारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा इंस्पेक्टर स्तर पर करीब 70 लोग काम करते हैं।