जयपुर. शहर के निजी अस्पतालों से बेहत्तर लक्जरी सुविधा व सेवाएं देने के लिए एसएमएस अस्पताल में भी थी-स्टार होटल जैसे कॉटेज वार्ड बनेंगे। जल्दी ही एसएमएस अस्पताल के 200 कॉटेज वार्ड में थ्री स्टार होटल की तरह की सुविधा मिल सकेगी। राज्य सरकार ने एसएमएस अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर सात मंजिला मल्टी स्टोरी कॉटेज वार्ड बनाने की कवायद शुरू हो गई है।
बनने वाले मल्टी स्टोरी कॉटेज वार्ड के लिए जहां पर एक ही छत के नीचे पार्किंग, फोन करने के साथ ही डॉक्टर व स्टाफ की उपलब्धता, किचन सुविधा, परिजनों के लिए अलग से कमरा, मॉड्यूलर ओटी, आईसीयू, पैथोलोजी, रेडियोडायग्नोसिस, कैफेटेरिया, डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टेशन, 24 घंटे डॉक्टर व स्टाफ तथा इमरजेन्सी आदि सुविधा रहेगी। अस्पताल में स्थान राज्य सरकार तथा निर्माण कार्य व अन्य सुविधा पीपीपी विकसित करेगा। अस्पताल में वर्तमान में सामान्य तथा वातानुकूलित सुविधा के 87 कॉटेज बने हुए है। जिनका शुल्क 150 से लेकर 800 रूपए तक का है।
प्रमुख सचिव (मेडिकल शिक्षा) जे.सी.महांति का कहना है कि एसएमएस अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर सात मंजिला मल्टी स्टोरी कॉटेज वार्ड बनाने के लिए प्रजंटेशन दिया जा चुका है। जिसमें पेड व अनपेड वालों के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाया जाना प्रस्तावित है। कॉलेज प्राचार्य डॉ.सुभाष नेपालिया को जगह चिह्नित करने के लिए पत्र लिखा है।
एसएमएस जैसे सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधा प्रदान करने के लिए पीपीपी मोड पर सात मंजिला मल्टी स्टोरी कॉटेज वार्ड बनाया जाना प्रस्तावित है। प्रदेश में बनने वाले सात मेडिकल कॉलेजों के लिए भी जगह चिह्नित की जा चुकी है तथा अंतिम चरण चल रहा है। डूंगरपुर में चिह्नित किए गए स्थान पर पहाड़ी व समतल क्षेत्र होने से वैलनेस सेन्टर बनाने के प्रयास किए जा रहे है। -राजेन्द्र राठौड़, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान सरकार
फायदा : मरीज के परिजनों को डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, एक ही छत के नीचे सुविधा, एसएमएस के अच्छे डॉक्टरों की सुविधा लेना आसान, जांच रिपोर्ट डॉक्टर के कंप्यूटर पर उपलब्ध. निजी अस्पतालों की अपेक्षा कम शुल्क आदि।
सात मेडिकल कॉलेज के लिए जगह चिह्नित
चूरू, अलवर, भरतपुर, डूंगरपुर, बाड़मेर, पाली एवं भीलवाड़ा में बनने वाली मेडिकल कॉलेज के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार अस्पताल से 8 से दस किलोमीटर के अंदर मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए ऐसी जगह चिह्नित की गई है, जहां पर पहाड़ी क्षेत्र है। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां पर वैलनेस सेंटर बनाया जाना भी प्रस्तावित है।
सुपरस्पशलिटी विकसित : मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज देने के लिए मेडिकल कॉलेज उदयपुर, बीकानेर एवं कोटा में सुपरस्पेशिलटी विकसित की जाएगी। प्रथम चरण में उदयपुर तथा इसके बाद में बीकानेर एवं कोटा में विकसित होगी।