जयपुर. पिछली गहलोत सरकार के समय हाउसिंग बोर्ड में निरस्त 431 आवास आवंटनों को पुनर्जीवित करने को मौजूदा सरकार ने गलत माना है। सरकार ने इन्हें निरस्त करने और एसीबी से जांच के आदेश दिए हैं। उधर, पिछली सरकार के समय 23 समाजों व संस्थाओं को रियायती दरों पर जमीन देने के मामले में 22 के आवंटन निरस्त रखे हैं, जबकि जोधपुर के सांवरलाल ओस्टियोपेथ ट्रस्ट को अस्पताल के लिए जमीन आवंटन का फैसला बहाल रखा है।
मंत्रिमंडल की कटारिया कमेटी हाउसिंग बोर्ड के फिर से बहाल पंजीयनों को लेकर पिछले 10 माह में दो बार अपनी सिफारिश दे चुकी है, लेकिन कैबिनेट में भी मामला रखे जाने का बाद इसका फैसला कमेटी की अनुशंसा पर छोड़ दिया गया। अब कमेटी की चार माह पहले हुई बैठक के मिनट्स जारी किए हैं। इसमें साफ किया है कि हाउसिंग बोर्ड में तत्कालीन अध्यक्ष परसराम मोरदिया के समय मृत पंजीयनों की बहाली गलत ढंग से की गई।
इसमें व्यक्तिगत हितों और अहित को ध्यान में रखकर फैसले किए गए। इस प्रकार एक ही साल में एक साथ 518 मृत पंजीयनों को लेकर फैसला करने के पीछे बड़े लेन-देन की भी आशंका है। सरकार को ऐसे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच या एसीबी से जांच करवानी चाहिए, जिससे स्पष्ट हो सके कि कितने मामलों में भ्रष्टाचार हुआ।
जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं दी
सरकार ने कटारिया कमेटी को 431 प्रकरणों की जांच करने को कहा था। इस संबंध में कमेटी ने हाउसिंग बोर्ड से ही जांच के नाम पर संबंधित प्रकरणों को दस्तावेज मंगवा लिए। लेकिन अभी तक किसी प्रकार की गंभीर जांच नहीं हुई। लिहाजा कमेटी ने भी कोई जांच रिपोर्ट जारी नहीं की और मिनट्स के आधार पर ही कार्रवाई को कहा। अब यूडीएच ने हाउसिंग बोर्ड को सभी पुनर्जीवित पंजीयन निरस्त करने के आदेश दिए।