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आरटेट में 7.5 लाख पास, सिर्फ 2.22 लाख के आए हैं 60 फीसदी अंक

7 वर्ष पहले
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जयपुर. राजस्थान में आरटेट उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षक बनने की योग्यता रखने वाले 7,50,218 में से 2,22,615 अभ्यर्थियों के 60 फीसदी या इससे अधिक अंक हैं। 2011 और 2012 में हुई आरटेट में 15 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। आरटेट की विज्ञप्ति के अनुसार पास करने वालों की संख्या भले ही 50 फीसदी के करीब हो, लेकिन 60 फीसदी अंक प्राप्त करने वाले सिर्फ 15 फीसदी ही हैं। इसमें सभी केटेगरी के अभ्यर्थी शामिल हैं। इनमें कुछ अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने दोनों वर्षों में हुई टेट उत्तीर्ण कर पात्रता प्राप्त कर रखी है।
टेट में 60 फीसदी या अधिक अंक का क्या मतलब
एडवोकेट संदीप कलवानिया ने बताया कि एनसीटीई की गाइडलाइन के मुताबिक टेट में न्यूनतम 60 फीसदी अंक प्राप्त करने वाला ही शिक्षक भर्ती के योग्य माना गया है। लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने आरटेट 2011 व 2012 में आरक्षित वर्ग को न्यूनतम उत्तीर्णांक में 5 से 20 फीसदी की छूट दे दी। इस पर कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ व खंडपीठ ने इस छूट को गलत माना। इस पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की।
40 हजार को नियुक्ति
आरटेट योग्यताधारी साढ़े सात लाख अभ्यर्थियों में 40 हजार अभ्यर्थी तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2012 में चयनित हो चुके हैं। इसमें करीब 27 हजार अभ्यर्थियों के आरटेट में 60 फीसदी से अधिक अंक थे। अब राज्य में आरटेट में 60 फीसदी या अधिक अंक धारी करीब 1 लाख 95 हजार अभ्यर्थी हैं।
20 हजार पदों पर अटकी भर्ती
अक्टूबर में 20 हजार पदों के लिए हुई तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा-2013 में 5 लाख अभ्यर्थी बैठे थे। पंचायतीराज विभाग अगर 60 फीसदी या अधिक अंक वालों को नियुक्ति देता है तो पिछली भर्ती के बाद शेष रहे 1 लाख 95 हजार अभ्यर्थियों में से ही नियुक्ति मिलेगी। हालांकि, आरटेट योग्यताधारी अन्य अभ्यर्थियों के भाग्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी के अंतिम निर्णय पर निर्भर होगा।
यह है प्रथम व द्वितीय स्तर का मतलब
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती दो स्तरों पर होती है। प्रथम लेवल में केवल बीएसटीसी डिग्रीधारी ही योग्य होते हैं। यह शिक्षक पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाते हैं। द्वितीय स्तर की परीक्षा के लिए बीएड डिग्रीधारी योग्य होते हैं। यह शिक्षक छठी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई कराते हैं।
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