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8 करोड़ में छोड़ रहे थे, अब वसूलने होंगे 31 करोड़

9 वर्ष पहले
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जयपुर.जेडीए हैदराबाद की जिस बिल्डर कंपनी को 8 करोड़ की सिक्योरिटी राशि जब्त करके छोड़ रहा था, मुख्य सचिव सी के मैथ्यू द्वारा गठित कमेटी और फाइनेंस अधिकारियों की आपत्तियों के बाद उसी कंपनी से अब 31 करोड़ रुपए वसूले जाएंगे। अब प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि हैदराबाद के बड़े नेता की इस कंपनी पर जेडीए पहले मेहरबानी क्यों कर रहा था?
जेएनएनयूआरएम के एक प्रोजेक्ट के तहत जेडीए ने एपीआर प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. को जयसिंहपुरा खोर में 2892 फ्लैट बनाने का ठेका दिया था। इन फ्लैट्स में शहर की 14 बस्तियां शिफ्ट की जानी थी। छह माह पहले काम बीच में ही छोड़ कंपनी भाग गई।
सूत्र बताते हैं कि आंध्रप्रदेश के आला नेताओं के दबाव में पहले तो जेडीए इस कंपनी को सिक्योरिटी राशि जब्त करके छोड़ रहा था, लेकिन जब फाइनेंस अधिकारियों की तरफ से यह आपत्ति उठाई गई कि दूसरी कंपनी से बचा काम कराने पर जेडीए को 31 करोड़ रुपए भुगतने पड़ेंगे। मामला सरकार के पास पहुंचा उसके बाद मुख्य सचिव सी के मैथ्यू ने ढाई माह पहले नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की।
बढ़ी लागत भुगतनी पड़ती जेडीए को
कमेटी ने तीन बैठकें कर तय किया कि काम में देरी और बीच में छोड़ जाने में कंपनी की गलती है। मार्च 2014 तक कार्य पूरा नहीं हुआ तो केंद्र की योजना में मिली 88 करोड़ रुपए की राशि 9 फीसदी सालाना ब्याज सहित जेडीए को चुकानी पड़ेगी। ऐसे में काम में देरी और लागत में वृद्धि के लिए एपीआर जिम्मेदार है। बचे कार्य का टेंडर दूसरी कंपनी को देकर निर्माण लागत में होने वाली वृद्धि की राशि करीब 31 करोड़ रुपए कंपनी से पीडीआर एक्ट के तहत वसूली जाए।
'एपीआर कंपनी काम बीच में छोड़ भागी। अब दूसरी कंपनी से बचा कार्य नया टेंडर जारी कर करवाएंगे। कमेटी के निर्णय के अनुसार अब आने वाली लागत के हिसाब से पीडीआर एक्ट के तहत एपीआर कंपनी से राशि वसूली जाएगी।'
कुलदीप रांका, कमिश्नर, जेडीए
योजना का कुल क्षेत्रफल: 61 बीघा 19 बिस्वा
प्रोजेक्ट को बनाने वाली कंपनी : मैसर्स ए.पी.आर. प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. हैदराबाद
कंपनी को प्रोजेक्ट जारी किया :17 फरवरी 2011
पूरा करना है : दो साल में (17 फरवरी 2013 तक)
कुल लागत : 87.50 करोड़
कार्य बाकी : करीब 85 फीसदी