पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

एसडीएम-तहसीलदार काे सरकारी वकील ने ही दिला दी सजा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जयपुर. गोचर की भूमि से अतिक्रमण हटाने के एक मामले में बयाना के तत्कालीन आरएएस अधिकारी रामनिवास मेहता व तहसीलदार पूरण चंद गुप्ता को एक-एक साल की सजा दिलाने वाले सहायक अभियोजन अधिकारी (सरकारी वकील) को राज्य सरकार ने एपीओ कर दिया है। 20 साल पुराने इस मामले में भुसावर की एक कोर्ट ने गत 23 फरवरी को ही सजा सुनाई थी। सरकारी वकील को एपीओ किए जाने को लेकर गृह विभाग और अभियोजन विभाग के बीच विवाद खड़ा हो गया है। अभियोजन विभाग से जुड़े अफसर सरकारी वकील के पक्ष में खड़े हैं। वहीं, गृह विभाग का मानना है कि सरकारी वकील की इसमें भूमिका सही नहीं रही। सरकार की तरफ से पैरवी करते समय सरकारी पक्ष एवं तथ्यों को कोर्ट के सामने नहीं रखा।


गृह विभाग के अनुसार बयाना के नवलपुरा गांव में गोचर की 10 बीघा जमीन पर एक स्थानीय व्यक्ति ने सरसों की फसल की बुआई कर दी थी। जिसमें कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम ने फसल नष्ट करवा कर भूमि पर सरकारी कब्जा लिया था। जिसकी फसल नष्ट की गई थी वह कोर्ट में चला गया। कोर्ट ने प्रकरण में प्रसंज्ञान लेते हुए ट्रायल शुरू कर दी। एसडीएम सहित अन्य को मुल्जिम मानते हुए कोर्ट ने केस की प्रकृति बदल दी। इसे सरकार बनाम रामनिवास कर दिया। सरकारी वकील राजेश शर्मा ने इस मामले में बहस की, जिसमें मान लिया कि तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार एवं अन्य का फसल नष्ट किए जाने का निर्णय गलत था। कोर्ट ने इस मामले में सजा सुना दी। आरएएस अधिकारी ने इस मामले में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया को शिकायत की। इसके बाद सरकारी वकील को एपीओ कर दिया गया है।

 

अभियोजन ऑफिसर की सफाई, सरकार की सख्ती
सहायक अभियोजन अधिकारी राजेश शर्मा ने अपनी सफाई में कहा कि कोर्ट के प्रसंज्ञान के बाद यह मसला रामनिवास बनाम राज्य सरकार में तब्दील हो गया था। कोर्ट ने गवाह बयान कराने के निर्देश दिए थे। इसलिए, मैंने परिवादी की तरफ से पैरवी की है। एपीओ राजेश अब अभियोजन निदेशालय में अपनी उपस्थिति दे रहे हैं। गृह विभाग का कहना है कि सहायक अभियोजन अधिकारी राजेश शर्मा को एपीओ कर दिया गया है। अभियोजन निदेशालय को इस मामले की जांच भी सौंपी गई है।


गोचर की भूमि पर फसल बुआई का था मामला
भरतपुर के बयाना क्षेत्र के नवलपुरा में गोचर की करीब 10 बीघा जमीन पर एक व्यक्ति ने सरसों की बुआई कर दी। 22 नवंबर, 1997 में कलेक्टर के आदेश और बयाना के तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता के निर्देश पर तत्कालीन तहसीलदार पूरण चंद गुप्ता ने फसल को हटा दिया था। काश्तकार ने इस्तगासे से दोनों अफसरों सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। इसमें पुलिस ने 13 जनवरी, 1998 को कोर्ट में एफआर पेश कर दी। वर्ष 2002 में कोर्ट ने प्रसंज्ञान लेते हुए मामले में ट्रायल शुरू की। गत 23 फरवरी को बयाना के तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता, तत्कालीन तहसीलदार पूरण चंद गुप्ता सहित तीन लोगों को एक-एक साल की सजा सुना दी।

 

 

 

खबरें और भी हैं...