पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अध्यक्ष महाेदय ! माफ कीजिए...राज्य विधानसभा के इतिहास में पहली बार

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जयपुर. विधानसभा में वार्षिक प्रतिवेदन देरी से रखने के मामले में गुरुवार को करीब 15 सीनियर आईएएस अफसर विधानसभा से माफी मांगेंगे। प्रदेश में यह पहली बार है जब प्रतिवेदन देरी से पेश करने के मामले में इतने सारे अफसरों को एक साथ माफी मांगनी पड़ेगी। दरअसल, प्रतिवेदन विभाग का सालाना ब्योरा होता है, जिसमें विभाग की योजनाएं और उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी होती है। विधायक इन्हीं जानकारियों के आधार पर विधानसभा में बजट अनुदान मांगों पर बहस में शामिल होते हैं और सवाल उठाते हैं। ये सवाल ही विकास योजनाओं का आधार बनते हैं। जिन विभागों के प्रतिवेदन विधानसभा में देरी से रखे गए उन सभी विभागों के मुखिया ने अपने लिखित माफीनामे कैबिनेट सचिवालय को भेज दिए हैं।

 

 

प्रतिवेदन देरी से पेश करने वालों में करीब 30 अफसरों के नाम थे। विधानसभा ने उन अफसरों को राहत दी है जिनके प्रतिवेदन एक-दो दिन ही लेट थे। बजट सत्र के दौरान प्रतिवेदन देरी से पेश करने का मुद्दा उठा था।

 

संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने सदन को जानकारी दी थी कि 72 प्रतिवेदन समय पर पेश नहीं हो सके। इस पर विधानसभा उपाध्यक्ष ने अफसरों को माफीनामा लेकर 12 मार्च को पेश होने को कहा था। बाद में 12 की जगह पहले 20, फिर 22 मार्च का समय दिया गया।

 

इन अफसरों के लिखित माफीनामे विभानसभा जाएंगे

 

जिन अफसरों ने लिखित माफीनामे भेजे हैं उनमें उच्च शिक्षा के एसीएस खेमराज, टीएडी व बालअधिकारिता के एसीएस जेसी मोहांति, वन विभाग के लिए एसीएस सुबोध अग्रवाल, स्थानीय निकाय विभाग के एसीएस मनजीत सिंह, जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव शिखर अग्रवाल, शिक्षा विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार, कार्मिक विभाग के सचिव भास्कर सावंत, खाद्य आपूर्ति विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा व आपदा राहत सचिव हेमंत गेरा शामिल हैं। मुख्य सचिव एनसी गोयल, कैबिनेट सचिव पीके गोयल व विधि सचिव आशुतोष कुमार मिश्रा माफीनामे लेकर विधानसभा जाएंगे।

 

 

खबरें और भी हैं...