पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • कैसे बदलेगा बजट का चेहरा बताएगी कमेटी

कैसे बदलेगा बजट का चेहरा बताएगी कमेटी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
प्रदेशमें बजट का नया पेटर्न लागू करने राज्य सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। इसमें वित्त, आयोजना, टीएडी, सामाजिक न्याय और एजी के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में प्रदेश का बजट नए स्वरूप में लागू किए जाने की तैयारी है। जिसमें लान और नोन प्लान की जगह कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडीचर के रूप में बजट पेश होगा। बजट का नया पेटर्न लागू होता है तो प्रदेश में कई विभागों की भूमिकाएं बदल जाएंगी।

कमेटी यह तय करेगी कि नए पेटर्न में आयोजना विभाग और वित्त विभाग क्या-क्या क्या जिम्मेदारियां संभालेंगे। जहां मौजूदा पेटर्न में वित्त विभाग ही बजट निर्धारण का काम करता है वहीं नए पेटर्न में प्लान बजट को आयोजना विभाग तैयार करेगा और नोन प्लान को वित्त विभाग। इसके सभी विभागों प्लानिंग ऑफिसर्स लगाने होंगे। इसके अलावा योजनाओं के पेटर्न में क्या बदलाव होगा और उसे इंटिग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम में किस तरह से शामिल किया जाए। इसका भी अध्ययन किया जाएगा। कमेटी का कंवीनर वित्त विभाग के विशिष्ठ सचिव (बजट) सिद्ध्रार्थ महाजन को बनाया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय चाहता है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना खत्म होने के बाद राज्यों का बजट पेटर्न बदला जाए। केंद्र इसके लिए पहले ही कमेटी बना चुका है। राज्य सरकार ने यह एडवांस कमेटी इसलिए बनाई है ताकि इस मामले में केंद्र से कोई बात या क्लेरीफिशेन देना हो किया जा सके।

राज्य सरकार के अफसर इस मसले में पहले से ही जम्मू कश्मीर के बजट पेटर्न का अध्ययन कर चुके हैं। पिछले साल आयोजना विभाग के संयुक्त सचिव निर्मल सेठी और धनपाल खंगार की टीम ने जम्मू कश्मीर के बजट पेटर्न की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

जम्मू और कश्मीर देश पहला राज्य है जिसने मौजूदा वित्त वर्ष में ही अपना बजट पेटर्न बदल दिया। यहां का बजट प्लान और नोन प्लान की जगह कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडीचर के रूप में पेश किया गया। मौजूदा स्वरूप में बजट दो भागों में पेश किया जाता है। इसमें पहला भाग प्लान और दूसरा नोन प्लान का होता है। आम आदमी की भाषा में समझें तो प्लान एक्सपेंडीचर उसे कहते हैं जो विकास पर खर्च किया जाता है। इसमें योजनाओं और निर्माण कार्यों पर होने वाला खर्च शामिल हाेता है। वहीं नोन प्लान एक्सपेंडीचर उसे कहते हैं जिसका विकास से सीधा कोई लेना नहीं है। मसलन कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और ऑफिस एक्सपेंडीचर आदी नोन प्लान में आते हैं। केंद्र सरकार चाहती है कि बजट को और ज्यादा स्पष्ट करने के लिए प्लान-नोन प्लान की जगह कैपिटल और रेवेन्यू में विभाजित किया जाए।

खबरें और भी हैं...