घरों में गंदा पानी आए, इसलिए सीवर लाइन साफ कर रहे हैं
शहरके हसनपुरा की बलाई बस्ती, धानका बस्ती, भैरूंजी का मंदिर रामदेव मंदिर सहित आसपास के क्षेत्र में रविवार को पेयजल के नलों मे बदबूदार सीवर का पानी सप्लाई हुआ। शिकायतों के बाद जलदाय विभाग के इंजीनियर लैब की टीम मौके पर पहुंचे और सैंपल की खानापूर्ति कर रवाना हो गए। इंजीनियरों ने सीवर चैंबर जाम होने के कारण दूषित पानी आने की दलील दी है। वहीं निगम के अधिकारियों ने सीवर चैंबरों से गुजर रही पानी लाइनों के लिए जलदाय विभाग के इंजीनियरों को जिम्मेदार बताया है।
शहर के हसनपुरा इलाके में लोगों को पेयजल किल्लत के साथ ही दूषित पानी की समस्या का सामना भी करना पड़ रहा है। क्षेत्र में 4 दिन से बदबूदार मटमैले रंग के पानी की सप्लाई हो रही है। लोगों को प्राइवेट टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। लोगों ने विभाग के अधीक्षण अभियंता अनुराग प्रसाद एक्सईएन केशव श्रीवास्तव के साथ ही एईएन दीपक शर्मा जेईएन को भी शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। निगम वार्ड-22 की पार्षद चंचल सैनी ने दूषित पानी की शिकायतों के बाद सीवर चैंबर खाली करवाने के जेटिंग मशीन बुलवा कर काम करवाया। लोग अपनी समस्या बताने के लिए दिनभर इंजीनियरों को फोन करते रहे, लेकिन उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया। लोगों ने विभाग के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
निगम जलदाय विभाग ने एक दूसरे को बताया जिम्मेदार
जलदायविभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर अशोक गर्ग का कहना है कि एसई एक्सईएन ने हसनपुरा क्षेत्र में कही भी दूषित पानी नहीं आने की सूचना दी है। सीवर चैंबर जाम के बारे में निगम ही कुछ कर सकता है। नगर निगम के सिविल लाइन जोन उपायुक्त रामावतार गुर्जर का कहना है कि मलबा भरने से सीवर लाइन जाम हो गई थी। वैसे सीवर चैंबर जाम होने से दूषित पानी आने से कोई संबंध नहीं है। जलदाय विभाग को अपनी पाइपलाइनों की जांच करवानी चाहिए।
दोबार बदल चुके हैं पाइपलाइन, फिर भी नहीं मिली राहत
स्थानीयलोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले 10 साल में दो बार पाइपलाइन बदली जा चुकी है। इस पर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च की जा चुकी है। विभाग के इंजीनियरों की मिलीभगत के कारण हर बार पाइपलाइनें सीवर लाइन चैंबरों में से डाल देते है। लोगों ने आशंका जताई है कि ठेकेदारों के कर्मचारी पाइपलाइन में लीकेज कर देते है ताकि दुबारा से पाइपलाइन का ठेका हो तथा उन्हें काम मिले। इसमें इंजीनियरों की भी मिलीभगत हो सकती है।
जलदायमंत्री की चेतावनी का नहीं पड़ा असर
जलदायमंत्री किरण माहेश्वरी दूषित पानी सप्लाई रोकने के लिए गंभीरता से काम नहीं करने वाले इंजीनियरों को चेतावनी दे चुकी है। इसके बावजूद एक्सईएन एईएन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। लोगों का कहना है कि शहर में दूषित पानी की शिकायतें बढ़ती जा रही है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में इंजीनियरों पर लोगों की शिकायतों के बावजूद कोई डर नहीं है तथा लोगों की शिकायतों को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।