नई गाइडलाइन के चक्कर में शुरू नहीं हो रहे आरटीई प्रवेश
जयपुर | आरटीईके तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की साल दर साल बढ़ती जा रही पुनर्भरण राशि को सीमित करने के फेर में सरकार नए सत्र के लिए आरटीई के प्रवेश शुरू नहीं कर पाई है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी सत्र से आरटीई में प्रवेश के लिए नई गाइडलाइन तैयार हो रही है। इसमें आरटीई की दुर्बल वर्ग की केटेगरी से सामान्य वर्ग के गरीबों को हटाकर आरटीई के लाभ से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग को डर है कि ऐसा होने से सामान्य वर्ग इसका विरोध कर सकता है और यह बदलाव कानूनी अड़चनों में फंस सकता है। इस कारण अभी इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है और प्रवेश का टाइम फ्रेम जारी करने में देरी हो रही है। पेरेंट्स वेलफेयर सोसायटी के संयोजक दिनेश कांवट का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। वे आरटीई एक्ट के नियमों में शामिल असुविधाग्रस्त केटेगरी में तो कोई बदलाव नहीं कर रहे, लेकिन दुर्बल वर्ग की केटेगरी में कटौती कर केवल बीपीएल पर ही लागू करना चाहते हैं। जबकि प्रदेश में 2003 के बाद बीपीएल में कोई नया नाम नहीं जुड़ सका है।
बदलाव का पुरजोर तरीके से विरोध किया जाएगा। अधिकारियों को प्रवेश सीमित करने की बजाय निजी स्कूलों पर अंकुश लगाना चाहिए, ताकि फर्जी प्रवेश नहीं हो सके। अधिकारी फर्जी प्रवेश रोकने में नाकाम रहे तो नए नियम लागू कर रहे हैं।