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जलमहल की पाल पर हुअा हरिहरशरण का सितार वादन

5 वर्ष पहले
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जलमहल की पाल पर हुअा हरिहरशरण का सितार वादन

सिटी रिपोर्टर } जलमहलकी पाल पर रविवार को अलग ही नजारा था। यहां ठंडी हवा के साथ सितार की मधुर स्वर लहरियां भी आने वालों को बरबस ही अपनी ओर खींच रही थीं। मौका था ‘म्यूजिक विद नेचर सीरीज’ के तहत हुई प्रदेश के वरिष्ठ सितार वादक हरिहर शरण भट्ट की प्रस्तुति का। ये सीरीज पिछले महीने संगीत आश्रम की ओर से शुरू की गई। इसके तहत महीने के दूसरे रविवार को गायन और वादन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सितार वादन का यह कार्यक्रम उसी के तहत आयोजित किया गया। हरि के वादन में अलग तरह का आकर्षण था। उन्होंने सुरों की अलग-अलग इकाइयों को जिस अंदाज में सजाया उससे ऐसा महसूस हो रहा था मानो जलमहल के पानी में लहरें कलकल करती अठखेलियां कर रही हों।

रागअहीरी पेश किया

उन्होंनेराग अहीरी को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। यह राग अहीर भैरव के समान ही है फर्क इतना है कि इसमें शुद्ध की जगह कोमल गंधार का प्रयोग किया जाता है। हरिहर ने कहा कि उन्हें यह राग संगीत गुरु पं.शशि मोहन भट्ट ने पैंतीस बरस पहले बताया था, वो तभी से इसकी साधना कर रहे हैं। यह राग बहुत कम गाया बजाया जाता है। उनके सितार वादन में मींड का काम भी अच्छा था। आरोह में कभी-कभी पंचम को लांघकर, मध्यम से धैवत पर जाने का अंदाज भी दिलकश था। उनके साथ तबले पर जयपुर के युवा कलाकार दिनेश खींची ने संगत की।

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