दिल जो कहता है वही करती हूं : सोनल
शौक जब रियाज में बदल जाए तो उम्र बढ़ने के साथ कला में अद्भुत आकर्षण देखते ही बनता है। लगता है मानो सारी कायनात कदमों की ताल के साथ मिलकर आनंद को गढ़ रही है। उम्र के पाश भी ढीले पड़ जाते हैं जब लगन का प्रबल प्रवाह कला के सांचे में ढलकर जीवन का पर्याय बन जाए। कुछ लोग होते हैं जिन पर उम्र के पड़ाव का असर नहीं नजर आता। इन्हीं कुछ शख्सियतों में हैं नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह। उनसे बातचीत के कुछ अंश...
71साल में भी ऊर्जा से भरी प्रस्तुति
उम्रके इस पड़ाव पर इतनी ऊर्जा का रहस्य उन्होंने खोला। वे कहती हैं, ‘मैं जो भी करती हूं दिल से करती हूं। मुझे सब खाना पसंद है। तला-भुना मैं कभी नहीं खाती। मेरी खुशी मेरा नृत्य ही है। इसके अलावा मेरे पास है ही क्या। मैं तो मरते दम तक अपनी कला की प्रस्तुति देना चाहती हूं।
जिंदगी का क्या है यूं ही चलती रहेगी, लेकिन आपको वो सब पहले कर लेना चाहिए जो जिंदगी को निखारते हैं।’
भरतनाट्यम से ओडिसी का रुख
भरतनाट्यम से ओडिसी की ओर रुख पर वे कहती हैं, ‘मेरा ससुराल उड़ीसा में है। शादी के बाद ससुर ने कहा कि अब तुम उड़ीसा की बहु हो तो ओडिसी क्यों नहीं परफॉर्म करतीं। मैंने कहा- ठीक है। ओडिसी नृत्य को अपना लिया। नृत्य तो एक ही बस स्टाइल बदल जाती है।’