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छह माह में रोडवेज को 18 लाख का नुकसान

5 वर्ष पहले
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रोडवेजमें पार्सल सप्लाई के टेंडर की समय अवधि खत्म होने के बाद भी नया टेंडर जारी नहीं होने से रोडवेज को हर महीने करीब 3 लाख रु. का नुकसान हो रहा है। जबकि दूसरी तरफ पुरानी पार्सल सप्लाई कंपनी की समय अवधि 6 माह से लगातार बढ़ाने से 6 माह में करीब 18 लाख रु. का नुकसान हुआ है। अधिकारियों की लापरवाही से रोडवेज प्रशासन एक बार टेंडर निरस्त कर चुका, अब दूसरी बार टेंडर को निरस्त करके तीसरी बार निकालने की तैयारी है।

गौरतलब है कि, रोडवेज प्रशासन ने लग्जरी, वोल्वो, एसी सहित अन्य बसों के माध्यम से 2012 में पार्सल सप्लाई का टेंडर तीन साल के लिए पुष्पक कोरियर को जारी किया था। इसकी समय अवधि 5 अगस्त, 2015 को खत्म हो गई, लेकिन उसके 15 दिन बाद रोडवेज ने टेंडर जारी किया। इसमें कंपनियों ने पूल बनाया और एक कंपनी ने आवेदन किया। नई कंपनी ने वर्तमान कंपनी से 3 लाख 30 हजार प्रति माह अधिक की रेट डाली। रोडवेज ने टेंडर की नियम-शर्तों में ही एक ही शर्त को दो तरह पेश कर दिया। एक जगह तो नियम-शर्तों में तीन साल और दूसरी जगह सिर्फ अनुभव मांगा है। रोडवेज प्रशासन की गलती के बावजूद अधिकारियों ने कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया। उसके बाद दूसरी बार 23 नवम्बर को टेंडर निकाला इसमें टेक्निकल बिड खुल गई, जिसमें वर्तमान कंपनी की अपेक्षा नई कंपनी की रेट 3 लाख 30 हजार रु. प्रति माह अधिक आई है, लेकिन अधिकारी अब फाइनेंशियल बिड नहीं खोल रहे।

^ दूसरी बार निकाले गए टेंडर में भी एक ही कंपनी ने आवेदन किया है। हालांकि उसकी रेट वर्तमान में सप्लाई कर रही कंपनी से अधिक है, लेकिन सिंगल कंपनी होने के कारण टेंडर निरस्त करके नए सिरे से निकाला जाएगा। इस पर मैं अकेला निर्णय नहीं ले सकता। फाइल रोडवेज मुख्यालय में भेजी गई है। -रविसोनी, चीफमैनेजर, डीलक्स

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