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दृष्टिबाधितों को सिखाई फोटोग्राफी की कला जेकेके में प्रदर्शित हैं जिद से उपजी बेहतरीन फोटोग्राफ
सिटी रिपोर्टर } जिनआंखों ने दुनिया देखी और ही उसके रंगों को महसूस किया। अगर वे आंखें दुनिया के रंगों को अपने अंदाज में कैमरे में क्लिक करने लग जाएं और वो भी पूरे प्रोफेशनल अंदाज में तो इसे उनकी जिद से जीवंत हुआ एक बेहतरीन तोहफा ही कहा जाएगा। जवाहर कला केंद्र की पारिजात प्रथम और द्वितीय कला दीर्घा शुक्रवार को ऐसा ही देखने को मिला। यहां बंगाल के सियराफुली कस्बे की सोसायटी फॉर ब्लाइंड के पांच बच्चों फणी पॉल, मिलन शर्मा, अंजन शेरेन, टिंकू हाजरा और दुली चंद रॉय की फोटोग्राफी प्रदर्शनी शुरू हुई है। जो भी इस प्रदर्शनी को देखने आया वो इन बच्चों की इस अनूठी पहल को बारीकी से देखता और सुनता चला गया। हालांकि ये पांच बच्चे बंगाल के हैं, लेकिन इनको हौसला दिया जयपुर के चंदन एस. राठौड़ और पद्मजा शर्मा ने। चंदन बताते हैं कि पहले यह प्रयास उन्होंने जयपुर के दृष्टिबाधित बच्चों को लेकर करना चाहा, लेकिन अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पाया। बंगाल की इस सोसायटी के संपर्क में आने के बाद सपना हकीकत में बदल गया।
ऐसेसिखाई की फोटोग्राफी : पद्मजाऔर चंदन ने बताया कि उन्होंने बच्चों के हाथ में कैमरा देकर उसकी सारी तकनीकी प्रक्रियाएं समझाई। फिर ऑब्जेक्ट को छूकर उससे एक निश्चित दूरी बनाकर फोटो खींचना सिखाया। इसके बाद आवाज सुनकर उस दिशा में क्लिक करना सिखाया। आवाज के आधार पर फोटो खींचने का यह प्रयास बेहद उत्साहजनक रहा। ये बच्चे कैमरे को पहले उसी अंदाज में आंख पर लगाते हैं जैसे आम लोग करते हैं। फिर बटन पर अंगुली सैट करते हैं और उसके बाद आवाज की दिशा में क्लिक करके दृश्य को कैद कर लेते हैं। अब तो ये इतने माहिर हो गए हैं कि कभी मैदान, कभी पहाड़ तो कभी पानी के नजारों तक को कैमरे में अपने अंदाज में उतार लेते हैं।