कब्र से मय्यत निकालने की घटना किसी फिरके की नहीं
जयपुर | पिछलेदिनों उदयपुर के एक कब्रिस्तान में मय्यत दफनाने को लेकर हुए विवाद पर मंथन करने के लिए राजधानी के मुसलमान शनिवार को मुस्लिम मुसाफिर खाना में जुटे। इनमें शहर के उलेमा, मोअज्जिज लोगों समेत हर मत के प्रतिनिधियों ने घटना की निंदा की, उसे अमानवीय माना और आगे ऐसी घटना हो, इसके लिए मशवरे भी दिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि इस घटना का किसी मसलक, फिरके मत के लोगों से संबंध नहीं है, यह असामाजिक लोगों की हरकत है।
बैठक में सर्वसम्मति से यह माना गया कि मरहूम मोहम्मद यूसुफ की मय्यत को कब्र से निकालना, अपमानित करना और उनके पुत्र के घर छोड़ आना बहुत निंदनीय है। राजस्थान मुस्लिम फोरम ने प्रशासन से दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की। बैठक में माना गया कि इस्लामी विद्वानों का सर्वसम्मत फैसला है कि किसी भी मस्लक को मानने वाले मुसलमान को किसी भी कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ है।
ये शरीक हुए चिंतन में...
सेंट्रलसुन्नी दावते इस्लामी के हाजी मोहम्मद रफत, राजस्थान मुस्लिम फोरम के मोहम्मद नाजिमुद्दीन, मुस्लिम मुसाफिर खाना के सचिव शौकत कुरैशी, जामा मस्जिद, जयपुर के अध्यक्ष नईम कुरैशी, इरादा सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. एम. हसन, वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सलावत खां, जमाते इस्लामी के प्रदेश मीडिया सचिव डॉ. मोहम्मद इकबाल सिद्दीकी, वहदते इस्लामी के प्रदेशाध्यक्ष साजिद सहराई, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के आलम खान, ऑल इंडिया शेख जमीयतुल अब्बास के अध्यक्ष इमामुद्दीन ठेकेदार, मौलाना आजाद फाउंडेशन के अध्यक्ष हबीब गारनेट, मंसूरी पंचायत के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ आरको, जामा मस्जिद के पूर्व प्रतिनिधि अनवर खान।
मुफ्ती शेर मोहम्मद का संदेश पढ़ा
इस अवसर पर जोधपुर से आया मुफ्ती शेर मोहम्मद का संदेश पढ़कर सुनाया गया। संदेश में उन्होंने भी घटना की निंदा की और कहा कि किसी की भी मय्यत हो, इस्लाम इसकी अनुमति नहीं देता कि उसे कब्र से निकाला जाए या उसका अपमान किया जाए।