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जल स्वावलंबन के पहले फीडबैक में सभी 33 कलक्टर फेल

5 वर्ष पहले
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जयपुर. जलस्वावलंबन अभियान में मुख्यमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट गंभीर हैं लेकिन 33 जिलों के कलक्टर अब भी अभियान के तय मानदंडों के अनुसार शुरू नहीं कर पाए हैं। कलेक्टरों को जनसहयोग से 1200 करोड़ रु. भी अभियान के लिए जुटाने हैं। इसमें एक भी कलक्टर अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर पाया है।

27 जनवरी से शुरू इस अभियान का पहला फीडबैक मुख्य सचिव सी एस राजन ने शनिवार को सभी कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर लिया। उन्होंने जिन-जिन सवालों के जवाब मांगे, एक भी कलेक्टर अपेक्षा पर खरा नहीं उतरा। इससे नाराज होकर राजन ने चेता दिया कि सीएम के स्तर से मॉनिटरिंग हो रही है, गंभीरता से नहीं लिया तो अभियान फेल हो जाएगा। कलेक्टरों के रवैए से लगता है कि वे इस अभियान को भी वाटर शैड अभियान मानकर चल रहे हैं। यह सोच नहीं चलेगी। सीएस ने कलेक्टरों से कहा कि जल स्वावलंबन में अभी तक जो काम हो रहे हैं वे वाटरशेड प्रोग्राम की तरह ही हो रहे हैं, अगर पुराने ढर्रे पर ही काम करना था तो फिर नए अभियान का क्या मतलब? सीएस ने अभियान में गाइडलाइन के मुताबिक नए सिरे से काम करने और कुछ इनोवेटिव आइडिया लाकर नए सिरे से पानी बचाने के काम हाथ में लेने को कहा है।

सीएमकर सकती है तलब

मुख्यसचिव ने कहा कि कलेक्टर अभियान के प्रति काम चलाऊ रवैया अपना रहे हैं। यह गलत है। उन्होंने आगाह किया कि हर जिले की डीपीआर के अनुसार अगले 3 माह में बहुत कार्य कराने हैं। कुछ ही दिन में खुद मुख्यमंत्री इस संबंध में कलेक्टरों को तलब कर सकती हैं।



इसलिए कोई कलक्टर यह नहीं समझें कि वाटर शेड प्रोग्राम की तरह काम चल जाएगा।

जून तक हर सप्ताह लिया जाएगा फीडबैक

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का सबसे बड़ा सीएम ड्रीम प्रोजेक्ट है जल स्वावलंबन। यह अभियान पूरी तरह से जनता से जुड़ा हुआ है। जन सहयोग से पानी का संरक्षण करने के लिए स्थानीय जरूरत के हिसाब से काम हाथ में लिए जाने तय हुए हैं। सीएस ने कहा कि वे खुद जून अंत तक हर सप्ताह इसका फीड बैक लेंगे। किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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