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जो एक साल में पूरी हो, वही सौगात होंगी

5 वर्ष पहले
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राज्य बजट तैयार करने के लिए इस बार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनकी टीम खास तैयारियां कर रही हैं। बजट में उन्हीं घोषणाओं को शामिल किया जा रहा है जो एक वित्त वर्ष में ही पूरी की जा सके। खास तौर पर ऐसी घोषणाएं जिनके लिए डीपीआर तैयार करने की जरूरत होगी।

मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में 500 घोषणाएं की गईं। इसमें से 150 घोषणाएं ऐसी हैं जो जमीन पर नहीं सकीं। शेष घोषणाओं में भी 45 प्रतिशत पूरी हुई हैं और 25 प्रतिशत प्रक्रियाधीन है। इनमें बड़ी परियोजनाओं को गिनें तो 20 हजार किलोमीटर की सड़कों का निर्माण, मंदिरों का जीर्णोद्धार, सार्वजनिक कंपनियों का विनिवेश, मेडिकल कॉलेज जैसी घोषणाएं शामिल रहीं।

अब सरकार चाहती है कि इस साल बजट में छोटी घोषणाएं ही शामिल की जाएं ताकि उनके इंप्लीमेंटेशन का रिजल्ट शो किया जा सके। ऐसे में उन्हीं प्रस्तावों काे बजट घोषणाओं में शामिल किया जा रहा है जिन्हें लागू करने में वित्तीय, प्रशासनिक या विधिक दिक्कतें नहीं हों। इसके अलावा जो बजट प्रस्ताव अब तक विभाग तैयार करते थे उनके लिए अब विधानसभावार बैठकें की जा रही हैं। इन बैठकों में जनप्रतिनिधियों को प्रफोर्मा दिया जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि प्रफोर्मा में वे तीन जरूरी काम लिखें जो वे क्षेत्र में करवाना चाहते हैं। इसके बाद प्रफोर्मा पर सीएम अपने अफसरों की टीम के साथ डिस्कशन करती है। अफसर प्रस्ताव की फिजिबिलिटी चैक करते हैं। अगर प्रस्ताव फिजिबल है तो ही उसे बजट घोषणा में शामिल किया है।

चार संभागों के विधानसभा क्षेत्रों से हो चुका डिस्कशन

विधानसभावारबैठकों में अब तक जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग की विधानसभाओं के प्रतिनिधियों से बजट प्रस्तावों पर चर्चा की जा चुकी है। उदयपुर संभाग में मुख्यमंत्री ने शनिवार को चार जिलों के प्रतिनिधियों और अफसरों के साथ बजट में शामिल किए जाने वाले कामों पर मंथन किया। रविवार को संभाग के शेष जिलों के विधानसभा क्षेत्रवार बैठकें ली जाएंगी। साथ ही जोधपुर संभाग के जालौर, पाली और सिरोही जिले की बैठक 15 फरवरी को तय है। विधानसभावार बैठकों के लिए क्षेत्र के एमएलए, एमपी पदािधकारियों को बुलाया जा रहा है।

अलग-अलगस्तरों पर समीक्षा

दिसंबरमें सरकार ने विधायकों को निर्देश दिए थे कि वे संबंधित एसडीएम के साथ क्षेत्र में जाकर पांच प्रमुख समस्याओं को चिन्हित करें। इसकी रिपोर्ट प्रशासनिक सुधार विभाग को दी गई। इसके बाद सीएम के स्तर पर इस रिपोर्ट की समीक्षा की गई। बजट प्रस्तावों में मुख्य रूप से स्कूल, कॉलेज, सड़कें, पानी और मेडिकल फेसिलिटी शुरू करने की मांग की जा रही है।

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