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सैनिक स्कूलों में बेटियों को प्रवेश- केन्द्र 3 महीने में मंशा पर पुनर्विचार करे

5 वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर. जयपुर | हाईकोर्टने सैनिक मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश नहीं देने और संविधान के प्रावधान आरटीई कानून का उल्लंघन मामले में केन्द्र सरकार को 26 अक्टूबर को दिए आदेश के पालन पर तीन महीने में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह अंतरिम निर्देश सोमवार को माही यादव की पीआईएल पर दिया। सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि इस साल अदालत के आदेश का पालन करना संभव नहीं है। जिस पर अदालत ने केन्द्र सरकार को तीन महीने का समय दिया।

गौरतलब है कि अदालत ने 26 अक्टूबर को केन्द्र सरकार को कहा था कि वह सैनिक मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश के लिए किए आवेदनों को जमा कर उन पर नीतिगत निर्णय करें। पीआईएल में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 आरटीई कानून के तहत शिक्षा मूलभूत अधिकार है। लेकिन सैनिक मिलिट्री स्कूलों में लिंग के आधार पर भेदभाव हो रहा है और लड़कियों को प्रवेश नहीं दिया जाता। लड़कियों को स्कूल में प्रवेश नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 15 और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

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