67 लाख किसानों के दो माह से अटका रखे हैं 1100 करोड़ रु.
किसानों को 10 दिन में क्लेम नहीं तो हर दिन देना होगा 18% ब्याज
नया क्लेम भी 30 दिन में ही करना होगा पास
नियमोंके हिसाब से फसल खराबे के आंकड़े मिलने के 30 दिन बाद बीमा कंपनियों को क्लेम पास करना होता है। लेकिन बीमा कंपनियां और बैंकों की मिलीभगत के चलते किसानों तक क्लेम पहुंचने में इससे कहीं ज्यादा वक्त लगता है। इसलिए कंपनियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि फसल खराबे के आंकड़े जारी होने के 30 दिन के अंदर ही किसानों को बीमा क्लेम जारी करना होगा। इसके लिए बीमा कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि अब बैंकों को मास्टर डाटा शीट भेजने की जगह प्रत्येक किसान की खाते के साथ जानकारी भेजेगी। इससे किसानों के खाते में पैसे जमा होने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और पैसा सीधा किसान के खाते में जमा करवाया जा सकेगा। इसके साथ ही राजस्व विभाग को भी निर्देश दिए गए है कि क्रॉप कटिंग के आंकड़े ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठे किए जाएं। राजस्थान के 33 में 23 जिलों में मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू है। वहीं 13 जिलों में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत किसानों को लाभ दिया जा रहा है।
वर्ष 2015
फसलखराबे का क्लेम पिछले दो महीनों से बीमा कंपनियों ने जारी नहीं किया
वैदर स्टेशन पर सरकार करेगी मॉनिटरिंग
मौसमआधारित बीमा में वेदर स्टेशन की रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों के लिए बीमा क्लेम निर्धारित होते हैं। किसानों की शिकायत रहती है कि वैदर स्टेशन कंपनियां और बीमा कंपनियों की सांठ-गांठ के चलते मौसम की सही रिपोर्ट जारी नहीं होती। अब सरकार हर जिले में वेदर स्टेशन की रिपोर्ट की अपने स्तर पर भी मॉनिटरिंग करेगी।
वर्ष 2015 में खरीफ फसल में हुए खराबे का क्लेम पिछले दो महीनों से बीमा कंपनियों ने जारी नहीं किया है। इसमें मौजूदा वित्त वर्ष में मौसम आधारित फसल बीमा योजना और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत करीब 67 लाख किसानों को करीब 881 करोड़ रुपए का क्लेम मिलना है। इसके अलावा 2013-14 का भी करीब 200 करोड़ रुपए का क्लेम बीमा कंपनियों ने रोक रखा है।