िनयमन में गड़बड़ी की जांच के लिए एसीबी में परिवाद
जयपुर | नगरीयविकास मंत्री राजपाल सिंह भले ही पृथ्वीराज नगर में नियमन के दौरान गड़बडिय़ों के मामले की एसीबी से जांच कराने से पीछे हट गए हों, लेकिन अब कई लोग इस मामले को लेकर एसीबी पहुंच गए हैं। पृथ्वीराज नगर से जुड़े कई लोगों ने खाली जमीनों का मिलीभगत कर पहले नियमन करने का आरोप लगाते हुए एसीबी में एडीजी भूपेंद्र दक को परिवाद दिया है।
लोगों ने अपने परिवाद में बताया है कि जेडीए के अधिकारियों ने पृथ्वीराज क्षेत्र में बड़े भूखंड धारियों से मिलीभगत कर उन्हें प्राथमिकता देकर उनकी कॉलोनियों का नियमन कर दिया। बड़े भूखंड धारियों ने अपनी जमीनों को अवाप्ति से बचाने के लिए अपने ही परिवार के लोगों के नाम जमीन के सोसायटी के पट्टे काट कर नियमन करवा लिया। छोटी कॉलोनी वासियों के रिकॉर्ड जमा होने के बावजूद कॉलोनी में तकनीकी गड़बड़ी बताकर नियमन होने से रोक दिया गया। एडीजी भूपेंद्र दक ने परिवादी की शिकायत को जांच के लिए सौंपा है। स्थानीय लोगों ने परिवाद में यह भी शिकायत की है कि जेडीए अधिकारियों ने रसूखदारों के बड़े भूखंड सेक्टर रोड में आने के कारण सेक्टर रोड का अलाइनमेंट बदल दिया, जिससे क्षेत्र में पहले से बसी हुई घनी आबादी का क्षेत्र प्रभावित हो रहा है इस बारे में प्रभावित लोगों ने विरोध कर जेडीए अधिकारियों को शिकायतें की, लेकिन इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया गया।
प्लॉटों के नियमन मामले को लेकर राजपाल सिंह शेखावत रविवार को पृथ्वीराज नगर क्षेत्र में पहुंचे थे। मंत्री के पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और जेडीए अधिकारियों द्वारा नियमन में की जा रही मिलीभगत की शिकायतें की थी। शिकायतें सुनकर राजपाल सिंह ने पृथ्वीराज नगर में पट्टे बांटने कॉलोनियों के नियमन में हुई मिलीभगत को माना था। उन्होंने मौके पर लोगों को पृथ्वीराज नगर नियमन मामले में जेडीए अधिकारियों द्वारा की जा रही गड़बडिय़ों की एसीबी से जांच का आश्वासन दिया था। हालांकि दूसरे ही दिन भास्कर से हुई बातचीत में उन्होंने एसीबी के बजाए एसीएस से जांच कराने की बात कह दी।
तकनीकी कारणों की आड़ में कैंप खारिज होने का सिलसिला जारी
पृथ्वीराजनगर के जोन 16 में नए जोन उपायुक्त की जिम्मेदारी तय करने के बावजूद कैंप खारिज होने का सिलसिला जारी है। जेडीए ने बुधवार को कैलाश विहार योजना के दो दिवसीय कैंप खारिज कर दिए हैं, जो कि 11 और 12 फरवरी को लगने थे। कैंप खारिज होने के पीछे जोन उपायुक्त ने केवल तकनीकी कारण बताए हैं, जिन्हें स्पष्ट नहीं किया गया है।