मेट्रो स्टेशनों पर बीसलपुर का पानी देने के पाइपों में पोल, गहराई भी कम
नतीजा : टेस्टिंगमें ही लीकेज, नलों में पहुंचाना था पानी, नालियों में बह गया
इंजीनियरों की दलील : पूरे समय मौजूद रहना मुश्किल
विभागके एक्सईएन केशव श्रीवास्तव ने बताया कि जमीन में केबल या सीवरलाइन होने पर कम गहराई पर पाइपलाइन डालनी पड़ती है। वैसे सख्त मॉनिटरिंग करवाई जा रही है। सहायक अभियंता दीपक शर्मा का कहना है कि ठेकेदार को रश्मि कंपनी के पाइप की टेस्टिंग रिपोर्ट है। पाइपलाइन डालने के दौरान पूरे समय मौजूद रहना मुश्किल है। वैसे कार्य का मेजरमेंट करने के दौरान पूरी जांच करते हैं। भुगतान एक्सईएन करते हैं।
ठेकेदारके मेजरमेंट को सही मान लेते है इंजीनियर
जलदायविभाग में पाइपलाइन डालने के कार्य का भुगतान एमबी (नाप पुस्तिका) के अनुसार होता है। पाइपलाइन डालने के दौरान इंजीनियर मौजूद ही नहीं रहे। इंजीनियर एमबी में पाइप गहराई के बारे में ठेकेदार से पूछकर भर लेता है। ऐसे में सही भुगतान होने पर सवाल उठ रहे हैं।
इनइंजीनियरों को करनी है मॉनिटरिंग : अधीक्षणअभियंता (साउथ) अनुराग प्रसाद, एक्सईएन (कार्यवाहक) केशव श्रीवास्तव, सिविल लाइन एईएन दीपक शर्मा, सिविल लाइन जेईएन नैना शर्मा।
कार्यालय के पास ही 2 फीट से कम गहराई पर पाइपलाइन
सिविललाइन में विभाग के कार्यालय के पास इंजीनियरों ने मंगलवार को केवल 2 फीट से कम की गहराई पर पाइपलाइन डलवा दी। रोड क्रॉसिंग पर कम गहराई पर पाइपलाइन डालने से लीकेज होने की आशंका बढ़ गई है। आरोप है कि ठेकेदार ने टेस्टिंग करवाई कंपनी के बजाए दूसरी कंपनी के पाइप केवल डेढ़ से दो फीट की गहराई पर ही डाल दिए।
इंजीनियरोंकी गैर मौजूदगी से यह है नुकसान
>पाइपलाइन की गहराई कम होने से वाहन या अन्य दबाव से टूटने की आशंका रहेगी। लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा।
> पाइपलाइन डालने के दौरान खाई का लेवल समान होना चाहिए। असमान लेवल के कारण पानी सप्लाई प्रेशर पर विपरीत असर पड़ता है।
> तय कंपनी के अलावा दूसरे पाइप की क्वालिटी कम होती है। ऐसे में पाइप के जल्दी जर्जर होने की आशंका रहती है।
^मौके के हालात के आधार पर पाइपलाइन की गहराई तय करते हैं। रश्मि कंपनी के पाइप डालने थे, लेकिन पहले से बचे जिंदल के पाइप भी डाले है। वे भी आईएसआई मार्का हैं। टेस्टिंग के दौरान रहे लीकेज को सुधरवा रहे हैं। एमकेकुलश्रेष्ठ, प्रोजेक्ट इंजीनियर, दिविजा कंस्ट्रक्शन कंपनी
टेस्टिंग के दौरान पाइपलाइन में लीकेज से निकलता पानी।
सोढाला चौराहे पर कम गहराई पर डाली पाइपलाइन।
श्याम राज शर्मा | जयपुर
मेट्रोस्टेशनों पर बीसलपुर का पानी देने के लिए डाली जा रही पाइपलाइन की जलदाय विभाग के इंजीनियरों ने मॉनिटरिंग ही नहीं की। ठेका कंपनी ने जैसे काम किया, इंजीनियरों ने उसे पास कर दिया। भास्कर टीम ने लगातार तीन रात प्रोजेक्ट स्थल पर काम का तरीका देखा। पाइप कम गहराई में डाले गए हैं। लेवल का भी ध्यान नहीं रखा गया है। जो पाइप डालने थे, उसकी जगह दूसरी कंपनी के पाइप डाले गए। भास्कर टीम ने संबंधित इंजीनियरों को इस बाबत बताया, मगर उन्होंने काम के पूरे समय मौजूदगी में असमर्थता जता दी। बहरहाल, बिना मॉनीटरिंग ठेकाकर्मियों के भरोसे किए काम का बुरा नतीजा सामने आने लगा है। दो दिन इस पाइपलाइन की टेस्टिंग की गई, तीन जगह लीकेज हुआ। फिर लाइन खोदी, सुधारा। हालांकि स्टेशन तक पानी नहीं पहुंचा। हालांकि प्रोजेक्ट के वर्कआर्डर 94 लाख रुपए में से 80 लाख का भुगतान दिविजा कंस्ट्रक्शन कंपनी को हो चुका है।
क्याहोना था, क्या हुआ
>पाइपलाइन की गहराई 3 फीट तक रखना जरूरी था, कई जगह यह 2 फीट पर ही डाल दी गई।
> एक समान होना हो चाहिए था पाइप डालने की नाली का लेवल। इसका जरा भी ध्यान नहीं रखा, पाइप उबड़-खाबड़ लेवल पर डाले गए।
> इंजीनियर की मौजूदगी जरूरी होती है, जबकि तीन रात भास्कर टीम ने देखा- जेईएन एईएन मौके पर नहीं थे।
> मौके पर भरी जाए काम की एमबी (नाप पुस्तिका), ऐसा नियम है। मगर, जब इंजीनियर मौके पर थे ही नहीं तो ऐसा हुआ भी नहीं।
साफपानी पिलाने का प्रोजेक्ट, लीकेज से दूषित पानी मिलने का डर
मेट्रोस्टेशनों पर बीसलपुर योजना से पानी देने के लिए जयपुर मेट्रो ने जलदाय विभाग को 125 लाख रुपए दिए हैं। सिविल लाइंस, श्याम नगर मानसरोवर सेक्टर-1 के पंप हाउसों से मेट्रो स्टेशनों तक पाइपलाइन डालनी है। फिलहाल सिविल लाइंस चौकी से अजमेर पुलिया के पास से सोढ़ाला मेट्रो स्टेशन तक पाइपलाइन डाली जा रही है पाइपलाइन टूटने दूषित पानी के निदान के लिए डक्टाइल आयरन (डीआई) पाइप की लाइन डाल रहे हैं। लोगों ने रात के समय इंजीनियरों की गैर मौजूदगी में हुए कार्य के दौरान हल्की क्वालिटी के पाइप डालने की आशंका भी जताई है तथा विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग की ओर से पाइप के सैंपल लेकर जांच करवाने की मांग की है।