जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक की बीमारियों का होगा इलाज
लिवर को री-जनरेट करना अंतिम इलाज ट्रांसप्लांट के बाद भी लेनी पड़ती है दवा
देश-दुनियामें लिवर डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं और लिवर ट्रांसप्लांट इलाज की एक प्रक्रिया है। लेकिन यह खुद एक तरह की बीमारी है क्योंकि ट्रांसप्लांट के बाद व्यक्ति को जीवन भर दवा लेनी पड़ती है। जो रिसर्च चल रही हैं उनमें प्रमुख यह है कि लिवर को ही री-जनरेट किया जा रहा है। चूंकि यह यह एक तरह की रिसर्च है जोकि काफी आसान नहीं। अभी तक केवल आठ लोगों में लिवर के री-जनरेट का काम किया गया है जिनमें से चार जनों पर यह पूरी तरह से सफल रहा है। यह कहना है डॉ. अनिल धवन का।
डॉ. अनिल लंदन के चाइल्ड हैल्थ किंग्स कॉलेज एंड हॉस्पिटल के क्लीनिकल डायरेक्टर हैं। डॉ. अनिल ने गुरुवार को निम्स हॉस्पिटल की ओर से आयोजित पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोबिलेरी, ट्रांसप्लांट एंड न्यूट्रीशियन की इंटरनेशन कांफ्रेस में जयपुर पहुंचे थे। डॉ. अनिल बताते हैं- हार्ट को भी रि-जनरेट करने की रिसर्च चल रही है और शीघ्र ही यह भी होगा। निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. बीएस तोमर और निदेशक डॉ. अनुराग तोमर ने बताया कि दस वर्ष पहले चिकित्सा क्षेत्र में भारत से काफी पीछे था। लेकिन पिछले दो वर्षों में सामने आया कि वह भारत से काफी आगे निकल गया। वजह सामने आई कि चीन ने करीब एक दशक पहले पारम्परिक चिकित्सा को एलोपैथी से जोड़ा।
सभी स्टूडेंट को पारम्परिक शिक्षा पढ़ना जरूरी किया गया। नतीजे के रूप से इसका फायदा मिला और आज चीन के एलोपैथी के इलाज में भी पारम्परिक इलाज दिया मिलता है। इसी प्रकार आयुष पद्धति को एलोपैथी से जोड़ने के लिए केन्द्रीय मंत्री श्रीपद नाइक से चर्चा की गई है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसा ही होगा और एलोपैथी से इसे जोड़ा जाएगा।
एंटीबायोटिक खत्म, नहीं आएंगे नए एंटीबायोटिक
अभी जितने वायरस हैं, उनमें लगभग सभी के एंटीबायोटिक हैं, लेकिन ये एंटीबायोटिक लंबे समय तक मरीज पर असर नहीं करेंगे। ऐसे कीटाणु सामने गए हैं जिन पर कोई भी एंटीबायोटिक काम नहीं कर रहे हैं। नए एंटीबायोटिक्स के लिए जो रिसर्च चल रही हैं, उसके हिसाब से भी नई दवाएं आने में समय लगेगा। यह कहना है डॉ. अनिता वर्मा का। डॉ. अनिता वर्मा लंदन के किंग्स मेडिकल कॉलेज की रिसर्चर हैं। उन्होंने बताया कि भारत में दवाओं के रिसर्च पर तुलनात्मक रूप से काफी कम पैसा खर्च होता है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है। डवलप देशों में जहां एंटीबायोटिक देने के नियम हैं, वहीं एशिया देशों में कोई भी व्यक्ति आसानी से यह ले सकता है। इसके भी काफी दुष्प्रभाव होते हैं। जो दवा रिसर्च के बाद सामने रही है, उसे देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी होनी चाहिए।
नई दवाएं आने में समय लगेगा
डॉ.अनिता वर्मा का कहना है कि अभी जितने वायरस हैं, उनमें लगभग सभी के एंटीबायोटिक हैं, लेकिन ये एंटीबायोटिक लंबे समय तक मरीज पर असर नहीं करेंगे। नए एंटीबायोटिक्स के लिए जो रिसर्च चल रही हैं, उसके हिसाब से भी नई दवाएं आने में समय लगेगा।
डॉ. अनिता वर्मा लंदन के किंग्स मेडिकल कॉलेज की रिसर्चर हैं।
आयुष पद्धति को एलोपैथी से जोड़ने के लिए केन्द्रीय मंत्री श्रीपद नाइक से चर्चा की गई है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसा ही होगा।
डॉ. तौमर।
लिवर को ही री-जनरेट किया जा रहा है। चूंकि यह यह एक तरह की रिसर्च है जो कि आसान नहीं है।
डॉ. अनिल धवन