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सीएम की डपट के बाद मंत्रियों को याद आए डस्टबिन, कचरा ढूंढ़ते रहे निगमकर्मी

5 वर्ष पहले
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~1367 करोड़ में से स्मार्ट सिटी को ~50 करोड़

भाजपाई पार्षद बजट पर कम अफसरों पर ज्यादा करेंगे चर्चा

गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में हुई साधारण सभा में पार्षदों के निशाने पर अधिकारी रहे। अधिकारियों की वजह से अटक रहे कार्यों और उनके गलत व्यवहार को लेकर पार्षद काफी खफा थे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अफसर सुनवाई नहीं कर रहे। कोई काम हो नहीं रहा, ऐसे ही लगातार दूसरा बजट पास करने जा रहे हैं। विकास के नाम पर कुछ हुआ ही नहीं जनता को क्या जवाब देंगे। उधर, मेयर निर्मल नाहटा ने भी पार्षदों से कहा कि वे बजट पर खुलकर अपनी बात रखें। सभी पार्षदों को शांतिपूर्ण बैठक चलाने और बजट मंजूर करवाने के निर्देश दिए। इस पर पार्षदों ने कहा कि क्या अफसरों की कार्यप्रणाली पर हम बात रख सकते हैं तो मेयर शहर अध्यक्ष संजय जैन ने छूट दी।





कुछ पार्षदों ने लाइट समिति के चेयरमैन चंद्र भाटिया की भी शिकायत जमकर की। पार्षद दिनेश कांवट, ओमसिंह सहित करीब एक दर्जन पार्षदों ने कहा कि भाटिया किसी की नहीं सुनते। जिसके कारण वार्डों में लाइटों के हाल खराब पड़े हैं। कॉलोनियों में अंधेरा छाया हुआ है। बैठक में शहर अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि कोर कमेटी की बैठक में

मुख्यमंत्री के समक्ष जयपुर नगर निगम का पूरा पक्ष रखा गया है। सीएम ने भी कार्यप्रणाली में सुधारने के निर्देश दिए हैं।

कांग्रेसी पार्षद मुंह पर काली पट्टी बांध कर बैठेंगे : नगर निगम की बजट को लेकर शुक्रवार को होने वाली साधारण सभा में कांग्रेस पार्षदों ने विरोध का नया तरीका अपनाएंगे। कांग्रेस पार्षद अपने मुंह

पर काली पट्टी बांधकर बैठेंगे और शांतिपूर्वक बजट भाषण सुनेंगे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी की ओर से कांग्रेस पार्षदों का मांगपत्र मेयर को दिया जाएगा। उपनेता धर्मसिंह ने बताया कि हर बार साधारण सभा में हमेशा कांग्रेस पर आरोप लगाया जाता है कि वे शहर विकास में अड़ंगा लगाते हैं। लेकिन अगर बैठक में विकास कार्यों को लेकर कोई गलत हुआ तो विरोध किया जाएगा। बैठक में मंजू शर्मा मोहन मीणा समेत कई पार्षद उपस्थित रहे।

ये सीएम हाउस के पास का दृश्य है

कचरा उठाने वाले नहीं िदखते बीनने वाले जरूर आते हैं

मंत्रियों ने कहा- डस्टबिननहीं होंगे तो कचरा फैलेगा ही

मंत्रियोंके बंगलों के बाहर कचरे के ढेर इसलिए रहते हैं क्योंकि यहां कचरा-पात्र ही नहीं हैं। निगम ट्रक जेसीबी की यूनिट लगाकर कचरा उठाता है, लेकिन पात्र रखने की नहीं सोचता। सीएम की फटकार के बाद जलदाय मंत्री, कृषि मंत्री खाद्य आपूर्ति मंत्री ने खुद आगे बढ़कर निगम अफसरों को फोन लगाया और अपने अपने बंगलों के बाहर कचरा पात्र रखवाने को कहा। निगम की आपत्ति के बाद मंत्रियों ने स्टाफ से कह दिया कि वे सड़क पर कचरा नहीं फेंके बल्कि निगम के संसाधनों को बुलाकर कचरा डलवाएं।

निगम अफसर बोले- मंत्रियोंका स्टाफ बेवक्त कचरा डालता है

निगमके हैल्थ उपायुक्त सीएल बेनीवाल और सीएसआई मदनमोहन शर्मा ने नियमित रूप से कचरा उठाने को कहा है। अफसरों का कहना है कि मंत्रियों के बंगलों में स्टाफ बेवक्त कचरा सड़क पर डाल देता है। जबकि सिविल लाइंस में दो पारियों में संसाधन कचरा उठाने नियमित जाते हैं। सुबह 11 बजे तक कचरा डाल दिया जाए तो पहली पारी में उठ जाए। इसके बाद जो कचरा आता है वह दूसरी पारी में उठाया जाता है। अगर इसके बाद कचरा डाला गया तो वह उठाने में दिक्कत आती है।

जबकि गैराजमें लगे कर्मचारियों के वेतन भत्तों और मॉनिटरिंग में लगे अफसरों के वेतन पर कुल खर्च होगा 20.10 करोड़ रुपए। यानी काम पर कम कर्मचारियों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।

निगम कचरा उठाने वाले संसाधनों पर 11 करोड़ रु. खर्च करेगा। पेट्रोल, डीजल ऑयल पर 11 करोड़ रु. खर्च होंगे और वाहनों के रखरखाव मरम्मत पर 9 करोड़ खर्च होने की उम्मीद जताई है।

डोर टू डोर 150करोड़ दवाइयोंफिनाइल 1.25करोड़

यानी जितनाडोर टू डोर प्रोजेक्ट पर खर्च होगा, उसका दोगुना कर्मचारियों के वेतन पर खर्च करेगा।

जबकि सफाईशाखा व्यवस्था में लगे कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर खर्च होंगे 244.50 करोड़ रुपए।

सफाई पर खर्च प्रस्तावितबजट 395.75करोड़ रुपएस्वास्थ्य शाखा

शहर के पार्कों के सुधार के लिए अनुबंध पर 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नए पौधे खरीदने पर 5 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। जबकि कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर 6 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

यानीअधिकतरकाम संविदा पर दिया जाएगा उसके बावजूद भी कर्मचारी बैठे तनख्वाह लेंगे।

स्मार्ट िसटी

वेतन भत्ता

सफाई के िलए

रोड लाइट सिस्टम सुधारने के लिए बिजली का सामान खरीदने पर 10 करोड़ और रखरखाव पर 12 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

जबकिकर्मचारियोंके वेतन-भत्तों पर 7.60 करोड़ रुपए बिजली के बिलों पर 8 करोड़ रुपए खर्च किए होंगे। यानी रोड लाइट सुधार की ज्यादा गुंजाइश नहीं हैं।

आग बुझाने के उपकरणों पर 1 करोड़ रुपए और फायर से जुड़े अन्य उपकरणों पर 50 लाख खर्च किए जाएंगे। जबकि 5 करोड़ रुपए कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर और 3 करोड़ रुपए अनुबंध पर लगे ड्राइवरों पर खर्च किया जाएगा।

यानीअग्निशमनबेडे को आधुनिक बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रहेगा।

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