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{ठाकुर मानसिंह कानोताके पूर्व रियासतदार

5 वर्ष पहले
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बसंत पंचमीपर बनने वाला केसरिया भात और इस भात से तैयार होने वाला जर्दा दोनों इस फेस्टिवल और खासकर शादी के मौके पर बनाए जाते हैं। यहां फर्क ये कि केसरिया भात बसंत के मौसम में खासतौर पर बनाया जाता है, वहीं जर्दा तैयार करते समय इसमें नमकीन और मसाले हटाकर चीनी और ज्यादा मात्रा में ड्राय फ्रूट्स का उपयोग किया जाता है। अब पहले बात करें केसरिया भात की।

राजस्थान में बसंत पंचमी को खास तरह से मनाया जाता है। इसमें पीले भोजन का चलन है और इसलिए केसरिया भात बनाया जाता है। इसके लिए बेहतर किस्म के चावल को पानी में उबाल लें। इसे एक कणी रहने तक पकाएं। इस बीच केसर घोटकर दूध के साथ थोड़े से काजू और बादाम एक घंटे पहले भिगोकर रखें और उनको काट लें। किशमिश साफ कर तैयार रखें। अब कड़ाही में घी गर्म करें। इसमें हरी इलाइची, लोंग, तेजपत्ता और दालचीनी का बघार लगाएं। फिर दूध मिला केसर डाल दें और तुरंत चावल भी डालें। फिर जरूरत के हिसाब से काजू, बादाम, किशमिश डालकर हल्के हाथ से मिलाएं। 5 मिनट बाद तक मिलाने के बाद आंच से उतार लें। इस दौरान हल्का नमक या चीनी दोनों का प्रयोग कर सकते हैं। इसे सजाने के लिए ड्राय फ्रूट्स की कतरन और चांदी का वर्क लगाएं। थोड़ी देर छोड़ने के बाद नए तरह के जायके का स्वाद ले सकते हैं।

ऐसेबनाएं जर्दा : केसरियाभात बनाने वाली ही प्रक्रिया अपनाकर आप जर्दा भी तैयार कर सकते हैं। इसमें नमक और मिर्च की जगह स्वाद अनुसार चीनी का प्रयोग करना पड़ेगा। कुछ जगह पर लोग गुड़ का भी प्रयोग करते हैं।

मायरेके समय बनता है जर्दा : राजस्थानमें ननिहाल से आने वाले मायरे के समय जर्दा बनाने का चलन है। वजह ये कि शादी के समय जब बेटी अपने पीहर को निमंत्रित करने जाती है तब साथ में गुड़ और पीले चावल ले जाती है। ऐसे में जब मायरे का वक्त आता है तब केसर युक्त चावल का जर्दा तैयार किया जाता है।

दोनो ही डिश-जयपुर की रॉयल फैमिलीज, ढूंढाड़, मेवाड़ और मारवाड़ के होटल्स ऑन डिमांड और खास अवसरों पर आमलोग बनवाते हैं।

केसरिया भात और जर्दा

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