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सिटी रिपोर्टर } उन्हेंतो शक्ल-सूरत से कोई मतलब है और

5 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर } उन्हेंतो शक्ल-सूरत से कोई मतलब है और ही वे जाति या कुंडली में यकीन करते हैं। उन्हें तो बस जिंदगी भर प्यार करने वाला और उन्हें सुनने-समझने वाला एक साथी चाहिए।

आज वैलेंटाइन्स डे है। प्यार का उत्सव मनाने का दिन। आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में लगभग चार मिलियन लोग ऐसे हैं जिनमें से महज 5 प्रतिशत को हमसफर मिल पाता है। ये लोग डिसएबल्ड हैं और इन्हें भी प्यार करने का पूरा हक है। इन्हें सही हमसफर से मिलाने के लिए दो सालों से एक प्लेटफॉर्म दे रही हैं मुंबई की 22 वर्षीय कल्याणी खोना।

डिसएबल्डको भी मिले साथी

जयपुरमें हाल ही हुए स्टार्टअप समिट में शामिल होने आई कल्याणी ने बताया कि उन्होंने डिसएबल्ड लोगों के लिए खास मैट्रीमोनियल स्टार्टअप \\\"वॉन्टेड अंब्रेला\\\' के जरिए दिल को छूने वाली कई लव स्टोरीज बनाने में मदद की। इन लोगों के लिए वे खास तौर पर क्यूरेट किए गए इवेंट्स और ग्रुप मीटिंग्स आयोजित करती हैं। यही नहीं उन्होंने लवेबिलिटी एप्प बनाया है जिससे मेंबर्स अपनी मेडिकल कंडीशन, वर्क प्रोफाइल, एजुकेशन शेयर कर सकते हैं। इसे दृष्टिबाधित लोग भी स्क्रीन रीडर्स सॉफ्टवेयर के जरिए ब्रेल डिसप्ले से एक्सेस कर सकते हैं। जब कल्याणी 21 साल की थीं तब उन्हें महसूस हुआ कि ऐसा क्यों है कि निशक्तजनों के लिए सिर्फ नौकरी की ही बात उठाई जाती है। इस बात पर सोचा ही नहीं जाता कि उन्हें संवेदनशील समाज के अलावा प्यार और एक सही हमसफर की जरूरत है। वो ऑफलाइन मैट्रीमोनियल ऑफिस भी गईं और उनसे डिसएबल्ड की प्रोफाइल भी शामिल करने के लिए कहा, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। कल्याणी ने कहा, “जब मैं फैसला नहीं ले पा रही थी तो पापा ने मुझसे कहा कि मुझे इन लोगों की जरूरतों के लिए खुद ऐसा स्टार्ट अप शुरू करना चाहिए। बस, मेरी जिद को दिशा मिल गई और मैंने ‘वॉन्टेड अंब्रेला’ शुरू की। यानी ऐसी छतरी जो उम्मीदों को महफूज रख सकती है। इनमें निशक्तजनों के अलावा थैलेसीमिया और ओबेसिटी के पेशेंट्स, सीनियर सिटीजंस, तलाकशुदा को भी उनके लाइफ पार्टनर से मिलाने में मदद करते हैं। हां,कुछ लोग इतने टूटे हुए होते हैं कि ग्रुप मीट अप्स में शामिल नहीं होते। ऐसे में उनकी खास जरूरतों और रुचि के मुताबिक उन्हें एक-दूसरे से मिलने का प्लेटफॉर्म देते हैं।

स्काइपपर मीटिंग

इनलोगों को मिलाने में टेक्नोलॉजी काम आई। बेशक ये अलग-अलग शहरों और राज्यों से होते हैं, लेकिन पहले गूगल हैंग आउट और स्काइप के जरिए उन्हें ऑनलाइन मिलवाते हैं। फिर फीडबैक के अनुसार बाकी मीटिंग तय की जाती हैं। ब्लाइंड और ऑटिस्टिक लोगों की मैचमेकिंग में वक्त लगता है, क्योंकि इनकी जरूरतें और कंफर्ट लेवल के मुताबिक बातचीत और मुलाकात तय की जाती है। सही साथी से मिलवाना और शादी के बाद कंसल्टेंसी भी जरूरी होती है।”

} हालही में \\\"वॉन्टेड अंब्रेला\\\' द्वारा आयोजित एक मीट में शामिल मेंबर्स। (इनसेट में कल्याणी)

डिसएबल के लिए बनाया लवेबिलिटी एप्प

कल्याणी खोना ने डिसएबल्ड लोगों के लिए शुरू किया खास मैट्रीमोनियल स्टार्टअप

सिटी एंकर

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