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स्त्री-पुरुष के बीच समानता की बहस को दिखाया आईना

4 वर्ष पहले
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जयपुर | ऐसामत करो, पति बुरा मानेंगे..., लाेग क्या कहेंगे..., पिता नाराज हो जाएंगे... समाज में स्त्री-पुरुष समानता की चलने वाली इस बड़ी बहस को नाटक के इसी एक डायलॉग ने करारा जवाब दिया। मौका था रवींद्र मंच के फ्राइडे थिएटर में इस बार जयंती दलवी के मराठी नाटक ‘पुरुष’ के मंचन का जो 1982 से खेला जा रहा है। कानपुर की निशा वर्मा के निर्देशन में खेले गए इस नाटक का हिंदी रूपांतरण सुधाकर करकरे ने किया। निशा ने नाटक में विभिन्न घटनाक्रमों से यह बताने की कोशिश की है कि भले ही हम समानता की लाख चर्चा करें, मगर जब बात औरत की सेल्फ रिस्पेक्ट और उसकी आजादी की होती है तो ऐसे ही पारंपरिक जुमलों से हम उसे रोक देते हैं।

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