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रिश्वत के आरोपी प्रोफेसर को सिंडीकेट ने किया बहाल, पेंशन अन्य लाभ देने के निकाले रास्ते

5 वर्ष पहले
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राजस्थानयूनिवर्सिटीके जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पीके गोयल को बुधवार को सिंडिकेट की बैठक में बहाल कर दिया गया। प्रो. गोयल को बहाली सशर्त दी गई है। गोयल को इसी वर्ष की शुरुआत में फैलोशिप बिल पास करने की एवज में छात्र से 20 हजार की रिश्वत लेते एसीबी ने पकड़ा था। तब से वे सस्पेंड थे। कुलपति जे.पी. सिंघल ने बताया कि कानूनी कार्यवाही चलती रहेगी। सिंडीकेट में बहाली दी गई है। बैठक में प्रो. ओम महला ने पेंशन प्रकरण की क्रियान्विति, भर्ती में योग्यता और आरक्षण के साथ एक अन्य मुद्दे पर नोट ऑफ डिसेंट दिया। इसको लेकर कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया।

इन शर्तों के साथ किया बहाल:

गोयल अगले महीने ही रिटायर्ड होने वाले हैं। सिंडीकेट ने उन्हें पेंशन के साथ अन्य फायदे दिलाने के लिए सशर्त बहाली का रास्ता निकाला है। जिसके अनुसार वे प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते, गाइड के रूप में काम नहीं कर सकते। उन्हें 2016 का इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा। इसके बाद कुछ मैंबर्स के आपत्ति करने के बाद शर्तों के साथ उन्हें बहाल किया गया।

सिंडीकेट के अन्य फैसले

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बीकानेर के प्रोफेसर बी आर छीपा को कुलपति सर्च कमेटी का सिंडीकेट नोमिनी बनाया गया। प्रोफेसर ओम महला ने प्रोफेसर वी एस व्यास का नाम भी सुझाया था, जिसे रिजेक्ट किया गया।

बैठक में पिछली सिंडीकेट के मिनट्स कन्फर्म किए गए और पांच शिक्षकों से करीब 2.92 करोड़ रुपए वसूलने पर विचार कर निर्णय के लिए प्रस्ताव रखा गया। इसका रिप्लाई एजी कार्यालय को देना है।

बैठक में कर्मचारी संगठनों को सिंडीकेट में प्रतिनिधित्व देने की मांग पर विचार किए जाने का आश्वासन।

इन शर्तों के साथ बहाल पी.के.गोयल अगले माह ही रिटायर होने वाले हैं। शर्तों के अनुसार वे प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते, गाइड के रूप में काम नहीं कर सकते। उन्हें 2016 का इंक्रीमेंट भी नहीं मिलेगा।

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