• Hindi News
  • National
  • 69 का हूं, मगर 5 किमी रनिंग, 15 किमी साइकिलिंग करता हूं, तभी तो फिट

69 का हूं, मगर 5 किमी रनिंग, 15 किमी साइकिलिंग करता हूं, तभी तो फिट

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
विश्व ईकोकार्डियोग्राफी 2017 : हार्ट स्पेशलिस्ट्स ने जताई चिंता, लोगों में लालच बढ़ने से बढ़ रहा है बैड स्ट्रेस

लोगवर्तमान में अपौष्टिक आहार ले रहे हैं। शारीरिक परिश्रम करने में पीछे हट रहे हैं। सुबह उठने से शाम तक खाने की बात करते रहते हैं। दिन में चार बार खाना खाते हैं। जितना खा रहे हैं, उतना शारीरिक परिश्रम नहीं कर रहे। फल फ्रूट-फल सब्जी की जगह तेल में तली चीजों का यूज कर रहे हैं। मैं 69 साल का हूं। इस उम्र में भी सुबह 5 किमी दौड़ लगाता हूं। 15 किमी तक साइकिल चलाता हूं। तब जाकर मैं फिट हूं। यह कहना है अहमदाबाद के कार्डियोलॉजिस्ट एवं एंजिलॉजिस्ट डॉ केयूर पारेख का। उन्होंने बताया कि मनुष्य को बंदर जाति से जन्म हुआ है। बंदर दिनभर भागते दौड़ते रहते हैं। फल-सब्जी खाते हैं। मनुष्य घी और तेल की तली चीजें खा रहा है। पहले लोग कम खाते थे, लंबा चलते थे। समृद्धि आने से खाना खाने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। इस वजह से चर्बी बढ़ रही है। बैठे रहने की प्रवृति ने भी हार्ट मरीजों की संख्या में दिनों दिन बढ़ोतरी हो रही है। पहले जरूरत की चीजों के लिए जैसे पानी और खाने के लोग लंबी दूरी तय करते थे। अब हर चीज रिमोट के माध्यम से चला रहे हैं। लालच बढ़ने की वजह से लोग तनाव में रहे हैं। इस वजह से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारी बढ़ रही है। हार्ट नलियों में ब्लाॅक होने की बीमारी को एंजाइना एथ्रोक्लॉरसेज कहते हैं। वाल्व खराब के मरीजों की संख्या में कमी हो रही है, लेकिन अन्य बीमारी लगातार बढ़ गई है। उम्र बढ़ने से जिलयाट्रीक डिजीज बढ़ रही है। हार्ट की बीमारी से वर्तमान में 60 से 70 साल की उम्र के 70 प्रतिशत लोगों की मौत हो रही है।

डॉ केयूर पारेख

डॉ आरआर कासलीवाल

बढ़ते तनावकी वजह से लगातार हार्ट डिजीज के पेशेंट की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में हर साल 30 प्रतिशत मौत हार्ट अटक से हो रही है। सवा सौ करोड़ जनसंख्या में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है। चिंतन-मनन करने की जरूरत है। 60 की उम्र में हार्ट अटक आना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन 40 की उम्र हार्ट अटक आना बेहद चिंताजनक है। इसे रोकने के लिए मेल को 25 फीमेल 30 की उम्र में पहला चेकअप करना चाहिए। ताकि पता चल सके कि उनके शरीर ओवरवेट तो नहीं है। डायबिटीज, बॉडी मास, ब्लड प्रेशर और कोलस्ट्रॉल की क्या स्थिति है। बढ़ी हुई है तो समय पर इलाज हो सकेगा। तनाव इतना बढ़ गया है कि हर व्यक्ति में चिड़चिड़ापन रहा है। रोड पर हाॅर्न भी बजता है तो गुस्सा जाता है। यह कहना है दिल्ली के मेदान्ता अस्पताल के चीफ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ आरआर कासलीवाल का। उन्होंने बताया कि खाने में सबकुछ खाइए, लेकिन लो फैट, लो कार्बोहाइड्रेट होना चाहिए। उसी हिसाब से व्यायाम, योग करना चाहिए। स्ट्रेस दो प्रकार के होते हैं। बैड एवं गुड। लालची होने से बैड स्ट्रेस लोगों में ज्यादा बढ़ रहा है। गुड स्ट्रेस पर ध्यान नहीं दे रहे। किसी काम को ध्यान और एकाग्रचित होकर करना गुड स्ट्रेस है। खाने में स्वीट्स, साल्ट लिमिटेड मात्रा में लेना चाहिए। आचार, पापड़, चटनी में अत्यधिक नमक होता है। इसका कम से कम इस्तेमाल किया जाए। सुबह चाय के बाद व्यायाम में प्रोग्राम बनाया जाए। पांच किमी व्यायाम वॉकिंग, रनिंग की जाए। स्ट्रेस के साथ पॉल्यूशन भी हार्ट के मरीज बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भीड़ भाड़ क्षेत्र में रहने वाले लोग में नॉइज पॉल्यूशन ज्यादा पाया जाता है। इनकी मृत्यु खुले में रहने वाले से आठ साल पहले हो जाती है।

खबरें और भी हैं...