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हार्ट संबंधित बीमारी पर जनता आज कर सकेगी सीधा संवाद

4 वर्ष पहले
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असामान्य हार्ट बीट से पैरालिसिस का खतरा

इस वजह डगमगाती है दिल की धड़कन

हार्टबीट और पल्स रेट यानी नाड़ी की धड़कन नियमित रहनी चाहिए। सामान्य इंसान के दिल की धड़कन 60 से 90 बीट प्रति मिनट (बीएमपी) होती है। इससे ऊपर या नीचे होने पर दिल को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में दिल की धड़कन को नियंत्रण में रखने के लिए समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। अन्यथा पैरालिसिस जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है। बेतरतीब जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें हृदय रोग के सबसे बड़े कारण हैं। देश में नहीं अन्य विकासशील देशों में भी 30 साल की उम्र में भी दिल की धड़कन दगा देने में पीछे नहीं हट रही। यह बात निकलकर आई है बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित इकोकार्डियोग्राफी सेमिनार में। सेमिनार के सह संयोजक डॉ अशोक गर्ग ने बताया कि सेमिनार का आयोजन वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ क्लीनिकल कार्डियोलॉजी की ओर से किया जा रहा है। नई दिल्ली से आए डाॅ. एस.के. चोपड़ा ने ‘इको कार्डियोग्राफिक एफ इवेल्यूएशन पर बताते हुए कहा कि किसी को लगे कि सामान्य परिस्तिथियों में उसके हृदय की धड़कन असामान्य है और थोड़ा भारी काम करने में थकान महसूस करता है, तो उसे तत्काल कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।

डॉक्टर अनुसार दिल को काबू में रखने के लिए दवा और जीवनशैली का उपयोग करना चाहिए।

शहर के लोग हार्ट संबंधित बीमारी के बारे में सीधे डॉक्टर्स से सवाल कर सकेंगे। इसके लिए आयोजकों ने रविवार को बिड़ला ऑडिटोरियम के सामने स्थित राॅयल हवेली में हार्ट टाॅक कार्यक्रम रखा है। डॉ. अशोक गर्ग ने बताया कि दो घंटे के कार्यक्रम के तहत जनता सुबह 7 से 9 बजे तक संवाद कर सकेगी। प्रवेश नि:शुल्क पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा। इसमें अमेरिका के डॉ. नवीन नंदा, डॉ. जे हो, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. थॉमस मरविक, डॉ. एच. के. चोपड़ा, डॉ. रवि कासलीवाल, डॉ. एस.के. पाराशर, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. विजय राघवन (त्रिवेंद्रम) से रहेंगे।

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