जयपुर. अब जयपुर एयरपोर्ट, जोधपुर के एयरफोर्स एयरपोर्ट सहित विभिन्न हवाई अड्डों के चारों तरफ तय दायरे से बाहर भवन की ऊंचाई की परमिशन लोकल स्तर पर जेडीए या शहरी निकाय से मिल सकेगी। अभी तक 15 मीटर से अधिक ऊंचाई के निर्माण की परमिशन के लिए फाइल दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजी जाती थी।
जयपुर में अभी एयरपोर्ट के चारों तरफ कई भवनों के अवैध निर्माणों का मामला गर्माया हुआ है। ऐसे प्रकरणों के निस्तारण और जेडीए तथा निकायों के पावर बढ़ाने के लिए नई कवायद की गई है। अभी जयपुर एयरपोर्ट पर रनवे की तरफ 3 किमी. और रनवे के दोनों तरफ 1-1 किमी. में निर्माण के लिए एनओसी जरूरी है। अब सभी एयरपोर्ट के चारों तरफ कलर कोडेड जोन तय किए गए हैं।
यह जोन प्रत्येक एयरपोर्ट के चारों तरफ मकान निर्माण व ऊंचाई की सीमा को निर्धारित करेगा। एयरपोर्ट वाले शहरों के कलर कोडेड जॉनिंग मैप संबंधित निकायों को एयरपोर्ट अथॉरिटी व संबंधित केंद्रीय मंत्रालय उपलब्ध कराएगा, जिसे संबंधित नगरीय निकायों को अपने मास्टर प्लान या जोनल प्लान में शामिल करना होगा। इससे हर निर्माण की अनुमति संबंधी फाइल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को नहीं भेजनी पड़ेगी।
जेडीए या निकाय अपने स्तर पर इस मैप से मिलान कर नक्शे पास कर सकेंगे। सीसीजेडएम से बाहर के भूखंडों पर निर्माण के लिए नक्शे आसानी से पास हो सकेंगे। निकाय द्वारा नक्शा पास करते समय एयरपोर्ट के चारों तरफ निर्धारित कलर कोडेड जोन और निर्मित क्षेत्र के भूखंड का मिलान किया जाएगा। मिलान में वह भूखंड कलर कोडिंग के तहत रेड श्रेणी में आता है तो उसकी परमिशन जेडीए या निकाय नहीं दे सकेंगे। निकायों को एयरपोर्ट के चारों तरफ भवनों के नक्शे पास करने तथा ऊंचाई संबंधी एप्रूवल देने से पहले इस नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
क्या है कलर कोडिंग जोन, कैसे मिलेगा फायदा
प्रत्येक एयरपोर्ट के चारों तरफ एक दायरा तय किया गया है। इसे मैप में कोडिंग के साथ दर्शाया गया है। आंशिक खतरे वाले स्थान से लेकर खतरे वाले स्थानों को अलग अलग रंग से इंगित किया गया है। इसे कलर कोडेड जॉनिंग मैप नाम दिया गया है। जेडीए आदि निकाय एयरपोर्ट के चारों तरफ अपने बायलॉज के अनुसार नक्शे पास करते समय संबंधित भूखंड का कलर कोडेड मैप से मिलान करेंगे। सीसीजेडएम में तय ऊंचाई व सीमा की पालना करने पर उस भूखंड पर निर्माण की अनुमति निकाय अपने स्तर पर दे सकेंगे। अभी तक यह केंद्र से यह एनओसी एयरपोर्ट के चारों तरफ तीन किलोमीटर के दायरे में हर भवन के लिए जरूरी की हुई है।
हां, हम पहले एक मीटिंग में गए, तब एयरपोर्ट अथॉरिटी की तरफ से कलर कोडेड जोन की बात की गई थी। यह नया नियम आ रहा है।इससे आमजन को भी आसानी रहेगी कि वेबसाइट पर सीसीजेडएम को दर्शाया जाएगा, जिससे तय होगा कि एयरपोर्ट के पास मकान बनाना संभव है या नहीं। -प्रवीण जैन, पूर्व चीफ टाउन प्लानर